
व्रतभारतीय · हिंदू
जीवित्पुत्रिका व्रत
Jivitputrika Vrat · जितिया व्रत
अगली तारीख़
रविवार, 4 अक्टूबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण नवमीअगले दिन 03:54 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसुअगले दिन 00:13 तक
- मास
- आश्विनअमांत पंचांग में भाद्रपद
- सूर्योदय
- 06:31सूर्यास्त 18:25
संक्षेप में
जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाता है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे ज़्यादातर लोग जितिया कहते हैं, संतान की कुशलता के लिए माताओं का कठिन व्रत है। ख़ासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में यह रखा जाता है। इसकी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक दयालु राजकुमार जीमूतवाहन की है। जीमूतवाहन को पता चलता है कि गरुड़ जी नियम से एक नाग को अपना आहार बनाते हैं। वहीं उनकी भेंट शंखचूड़ नाम के नाग युवक से होती है, जो अपने समाज को बचाने के लिए अपनी बलि देने को तैयार है। जीमूतवाहन चुपचाप उस युवक की जगह अपना शरीर सौंप देते हैं। इस अनोखे त्याग का पता चलने पर गरुड़ जी का मन पिघल जाता है। वे नागों को मारना बंद कर देते हैं, और जिन्होंने दुख झेला था उन्हें फिर से जीवन देते हैं। इस तरह यह कथा दूसरे की संतान और जीवन की निःस्वार्थ रक्षा को व्रत के केंद्र में रखती है। माताएँ परंपरा के अनुसार दिन-रात कठोर, और अक्सर निर्जला उपवास रखती हैं, बच्चों की सेहत और लंबी उम्र के लिए पूजा करती हैं, और स्थानीय तिथि और परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत पूरा करती हैं।
महत्व
जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
उपवास
यह निर्जला उपवास लगभग 36 घंटे का होता है। सप्तमी की शाम भोजन के बाद यह शुरू होता है और नवमी की सुबह खुलता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
तिथि कैलेंडर आपके फ़ोन में
आपके अपने शहर का पंचांग, चौघड़िया, त्योहार और रिमाइंडर। ऐप इंटरनेट के बिना भी चलता है।