
व्रतभारतीय · हिंदू
कजरी तीज
Kajari Teej
अगली तारीख़
शुक्रवार, 20 अगस्त 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण तृतीया18:53 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपदा07:38 तक
- मास
- भाद्रपदअमांत पंचांग में श्रावण
- सूर्योदय
- 06:16सूर्यास्त 19:09
संक्षेप में
कजरी तीज हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज इलाक़े और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
कजरी तीज बरसात के मौसम में आने वाला महिलाओं का त्योहार है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आसपास के इलाक़ों में यह ख़ास तौर पर मनाया जाता है। यह तीज रक्षाबंधन के बाद, भाद्रपद कृष्ण तृतीया (अमांत पंचांग में श्रावण कृष्ण तृतीया) को आती है। इसका नाम कजरी लोकगीतों की परंपरा से पड़ा है। इन गीतों में बरसते बादल, बिछोह, किसी की याद में तड़प, परिवार का स्नेह और बरसात में मायके जाने की बातें बार-बार आती हैं। पूजा आम तौर पर माँ पार्वती या तीज माता की होती है, और महिलाएँ सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएँ व्रत रखती हैं, मेहंदी लगाती हैं, सज-धजकर तैयार होती हैं और मिलकर कजरी गाती हैं। इसलिए यह दिन भक्ति के साथ-साथ गाँवों की बरसाती संस्कृति से भी गहराई से जुड़ा है। कुछ समुदायों में नीम के पेड़ या उसकी डाली की विधि-विधान से पूजा होती है। क्या पकेगा, कौन से गीत गाए जाएँगे और व्रत कैसे खोला जाएगा, यह सब स्थानीय रीति से तय होता है।
महत्व
कजरी तीज का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
उपवास
विवाहित महिलाएँ यह व्रत पति के लिए रखती हैं, और कुँवारी लड़कियाँ अच्छे वर की कामना से। चाँद देखने के बाद व्रत खोला जाता है, आम तौर पर सत्तू और घी से।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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