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कालभैरव जयंती

Kalabhairav Jayanti · काल भैरव जयंती

अगली तारीख़

सोमवार, 30 नवंबर 2026

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण सप्तमीअगले दिन 00:12 तक
नक्षत्र
आश्लेषा09:42 तक
मास
मार्गशीर्षअमांत पंचांग में कार्तिक
सूर्योदय
07:01सूर्यास्त 17:54
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संक्षेप में

कालभैरव जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तारीख़ और रीति-रिवाज़ क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

कालभैरव जयंती को भैरव अष्टमी भी कहते हैं। यह दिन भगवान शिव के उग्र लेकिन रक्षा करने वाले स्वरूप कालभैरव का है। पुराणों में कथा है कि जब अहंकार और अव्यवस्था को क़ाबू में करना ज़रूरी हो गया, तब भैरव प्रकट हुए। प्रसिद्ध कथा के अनुसार भैरव ने ब्रह्मा जी का घमंड तोड़ा, और इस कथा में गहरा संदेश है कि सृष्टि भी काल के अधीन है। ‘काल’ का अर्थ समय भी है और मृत्यु भी। इसलिए भैरव ऐसे रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों को याद दिलाते हैं कि जीवन क्षणभंगुर है और संयम ज़रूरी है। काशी जैसी पवित्र नगरियों में कालभैरव क्षेत्रपाल माने जाते हैं, यानी उस पवित्र क्षेत्र के शक्तिशाली रक्षक। भक्त भैरव मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं, दीया जलाते हैं, प्रार्थना करते हैं, उनके नामों का जाप करते हैं, और साहस, रक्षा और भय से मुक्ति माँगते हैं।

महत्व

कालभैरव जयंती भक्ति और पारिवारिक परंपरा का दिन है, जिसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।

कैसे मनाते हैं

पूजा सूर्योदय पर नहीं, आधी रात को होती है। कुत्तों को भैरव का मानकर खिलाया जाता है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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