
एकादशीगुजराती · हिंदू
कामदा एकादशी
Kamada Ekadashi
अगली तारीख़
शनिवार, 17 अप्रैल 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल एकादशी09:28 तक
- नक्षत्र
- मघा07:07 तक
- मास
- चैत्र
- सूर्योदय
- 06:16सूर्यास्त 19:02
संक्षेप में
कामदा एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
कामदा एकादशी की कथा राजा पुंडरीक के दरबार में रहने वाले गंधर्व दंपति ललित और ललिता की है। ललित बहुत अच्छा गायक था। एक बार राजा के सामने गाते समय उसका मन दूर रह रही पत्नी की ओर चला गया, और गायन में भूलें हो गईं। राजा को यह अपना अपमान लगा। क्रोध में आकर उन्होंने ललित को भयंकर राक्षस बन जाने का श्राप दे दिया। ललिता ने पति का साथ नहीं छोड़ा। वह उसके साथ भटकती हुई श्रृंगी ऋषि के आश्रम पहुँची। उसका दुख सुनकर ऋषि ने कहा कि कामदा एकादशी का व्रत करो और उसका पुण्य अपने पति को अर्पित करो। ललिता ने भक्ति से उपवास किया और व्रत का पुण्य ललित की मुक्ति के लिए अर्पित किया। श्राप मिट गया और ललित को फिर से गंधर्व का रूप मिल गया। यह कथा बताती है कि प्रेम भरी निष्ठा, पछतावा और नियम से की गई भक्ति जीवन बदल सकती है। परंपरा से यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इसमें उपवास और प्रार्थना होती है, और द्वादशी को पारण किया जाता है।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
चैत्र शुक्ल में आने वाली यह एकादशी चैत्र से शुरू होने वाले नए साल की पहली एकादशी है। मनचाहा फल देने वाली होने से इसका नाम कामदा है। यह चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के ठीक बाद आती है।
उपवास
चैत्र से शुरू होने वाले नए साल की यह पहली एकादशी है, जो चैत्र के शुक्ल पक्ष में आती है। उपवास बाकी एकादशियों जैसा ही है। दशमी को एक समय भोजन करें, एकादशी को कुछ न खाएँ, और द्वादशी की सुबह पारण करें।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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