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केवड़ा तीज

Kevada Trij · हरतालिका तीज

अगली तारीख़

शुक्रवार, 3 सितंबर 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल तृतीया14:19 तक
नक्षत्र
हस्त15:53 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:21सूर्यास्त 18:56
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संक्षेप में

केवड़ा तीज हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज क्षेत्र व स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

केवड़ा तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को रखे जाने वाले हरतालिका या गौरी व्रत का गुजराती रूप है। इस दिन के केंद्र में माता पार्वती का भगवान शिव से ही विवाह करने का दृढ़ संकल्प है। प्रचलित कथा है कि पार्वती जी के पिता उनका विवाह कहीं और करना चाहते थे। तब उनकी सखी उन्हें वन में ले गई, ताकि पार्वती जी अपना चुना हुआ तप जारी रख सकें। पार्वती जी ने शिव जी का रूप बनाकर या उनकी पूजा करके तप जारी रखा, और अडिग रहीं। अंत में भगवान शिव ने उनकी भक्ति स्वीकार की और विवाह के लिए हाँ कर दी। गुजरात में सुगंधित केवड़े के फूल से ही इस व्रत का नाम केवड़ा तीज पड़ा है, और पूजा में केवड़ा चढ़ाया जाता है। सुहागिन स्त्रियाँ परिवार के सुख और मेल-जोल के लिए प्रार्थना करती हैं, और कुँवारी लड़कियाँ परंपरा के अनुसार अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं। उपवास, शिव-पार्वती पूजा, कथा, आरती और फूल चढ़ाना आम है। क्या खाया जाए और क्या नहीं, इसके नियम हर घर में अलग होते हैं।

Shiva Purana के आधार पर

महत्व

केवड़ा तीज का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

Gujarati household practice के आधार पर

कैसे मनाते हैं

सुहागिन स्त्रियाँ पूरे दिन और पूरी रात बिना अन्न के यह व्रत रखती हैं, और कड़ाई से व्रत करने वाली स्त्रियाँ पानी भी नहीं पीतीं। केवड़ा बरसात में खिलता है। एक कथा के अनुसार शिव जी को केवड़ा नहीं चढ़ता, पर इस व्रत में वही केवड़ा शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। अगले दिन सुबह व्रत का पारण होता है।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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