
व्रतगुजराती · हिंदू
कोकिला व्रत
Kokila Vrat
अगली तारीख़
रविवार, 18 जुलाई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- पूर्णिमा21:14 तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढा11:17 तक
- मास
- आषाढ
- सूर्योदय
- 06:03सूर्यास्त 19:28
संक्षेप में
कोकिला व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
कोकिला व्रत आषाढ पूर्णिमा को आता है। लोक परंपरा में यह देवी सती और पार्वती के रूप में उनके पुनर्जन्म से जुड़ा है। एक कथा है कि दक्ष के यज्ञ में सती ने देह त्याग दी, उसके बाद कुछ समय तक वे कोयल के रूप में रहीं। फिर उन्होंने हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में दोबारा जन्म लिया। इसीलिए इस व्रत में कोयल प्रतीक बन गई। महिलाएँ कोयल की कूक सुनती हैं या प्रतीक के रूप में कोयल की पूजा करती हैं, और शिव-पार्वती से प्रार्थना करती हैं। यह व्रत भक्ति, पति-पत्नी के मेल और धैर्य व पवित्रता साधने के संकल्प से जुड़ा है। गुजरात समेत पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में यह व्रत एक छोटी-सी पूजा तक सीमित नहीं रहता। बरसात के दिनों में यह तय अवधि तक चलता है। यह कथा शिव जी से फिर मिलने के लिए पार्वती जी के अटल धैर्य को याद करती है, और वही अटल भक्ति इस व्रत की आत्मा है।
महत्व
कोकिला व्रत भक्ति और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा है, और इसमें आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी है।
उपवास
यह व्रत एक दिन का नहीं, पूरे महीने का है। आषाढ पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक ज़्यादातर लोग एक समय भोजन करते हैं, और कुछ केवल फल और दूध लेते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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