
व्रतभारतीय · हिंदू
महालक्ष्मी व्रत
Mahalakshmi Vrat
अगली तारीख़
शनिवार, 19 सितंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल अष्टमी15:27 तक
- नक्षत्र
- मूलअगले दिन 01:42 तक
- मास
- भाद्रपद
- सूर्योदय
- 06:26सूर्यास्त 18:40
संक्षेप में
महालक्ष्मी व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तारीख़ और रीति-रिवाज़ क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
महालक्ष्मी व्रत माँ महालक्ष्मी का कई दिनों तक चलने वाला व्रत है, और परंपरा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है। व्रत लगभग सोलह दिन चलता है, पर कोई तिथि बढ़ जाए या उसका क्षय हो जाए तो दिनों की गिनती आगे-पीछे हो सकती है। व्रत की पुरानी कथा में एक राजपरिवार की बात आती है, जिसका खोया सौभाग्य सच्चे मन से लक्ष्मी पूजा करने पर लौट आया। कथा में ज़ोर अचानक मिलने वाले धन पर नहीं, नियम से की गई भक्ति पर है। उत्तर और मध्य भारत की कई परंपराओं में महिलाएँ परिवार की समृद्धि, स्थिरता और कुशलता के लिए यह व्रत लेती हैं। वे पवित्र धागा बाँधती हैं, देवी की पूजा करती हैं और परिवार के रिवाज़ के अनुसार खान-पान के नियम मानती हैं। व्रत का इतना लंबा होना अपने आप में संदेश है कि समृद्धि धैर्य, व्यवस्था, कृतज्ञता और बार-बार की मेहनत से टिकती है। आश्विन कृष्ण अष्टमी (अमांत पंचांग में भाद्रपद) के आसपास पूजा के साथ व्रत विधि से पूरा होता है।
महत्व
महालक्ष्मी व्रत भक्ति और पारिवारिक परंपरा का व्रत है, जिसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।
उपवास
उपवास प्रायः पहले और आख़िरी दिन होता है। सोलह दिन के व्रत के बीच के दिन भूखे रहकर नहीं, पूजा से निभते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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