
जयंतीभारतीय · हिंदू
नारद जयंती
Narada Jayanti
अगली तारीख़
शुक्रवार, 21 मई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण एकम17:23 तक
- नक्षत्र
- अनुराधा14:50 तक
- मास
- ज्येष्ठअमांत पंचांग में वैशाख
- सूर्योदय
- 05:55सूर्यास्त 19:17
संक्षेप में
नारद जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
नारद जयंती पर देवर्षि नारद को याद किया जाता है। पुराणों, रामायण और महाभारत में नारद जी बार-बार आते हैं, कभी संदेश पहुँचाने वाले के रूप में, कभी उपदेश देने वाले के रूप में, और हमेशा भगवान विष्णु के अटूट भक्त के रूप में। नारद जी देवलोक और पृथ्वीलोक के बीच बेरोक-टोक घूमते हैं। वे समाचार पहुँचाते हैं, कठिन सवाल पूछते हैं, और ऐसी घटनाओं की शुरुआत कराते हैं जो पात्रों को धर्म की गहरी समझ तक ले जाती हैं। संगीत, वीणा और नारायण के नाम के निरंतर स्मरण से भी उनका नाम जुड़ा है। कुछ लोककथाओं में वे चुहल करते हुए झगड़ा लगाते दिखते हैं, पर उनके दख़ल से अक्सर अहंकार उजागर होता है, भक्ति की परीक्षा होती है या छिपा हुआ सच सामने आता है। इसलिए यह दिन सिर्फ़ एक पौराणिक ऋषि को याद करने का नहीं है। सच्ची बात को आध्यात्मिक उद्देश्य से पहुँचाने, और ज्ञान, संगीत व स्मरण के ज़रिए भक्ति को जीवित रखने का आदर्श भी इस दिन याद किया जाता है।
महत्व
नारद जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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