
जयंतीभारतीय · हिंदू
नर्मदा जयंती
Narmada Jayanti
अगली तारीख़
शनिवार, 13 फ़रवरी 2027
संक्षेप में
माघ शुक्ल सप्तमी को आने वाली नर्मदा जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तारीख़ व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
नर्मदा जयंती पवित्र नदी माँ नर्मदा का दिन है। नर्मदा भारत की सबसे पूजनीय नदियों में से एक है, और मध्य भारत की आस्था में इसका स्थान केंद्र में है। पुराणों की परंपरा नर्मदा को दिव्य नदी मानती है और विशेष रूप से भगवान शिव से जोड़ती है। एक प्रचलित कथा है कि माँ नर्मदा शिव जी की कठोर तपस्या से प्रकट हुईं। इसीलिए नर्मदा को पवित्र करने वाली और रक्षा करने वाली नदी माना जाता है। नर्मदा अमरकंटक से निकलकर पश्चिम की ओर मध्य प्रदेश और गुजरात से बहती हुई अरब सागर में मिलती है। तीर्थयात्रा की परंपरा में इसका पूरा प्रवाह पवित्र माना जाता है। कठिन नर्मदा परिक्रमा इसी असाधारण श्रद्धा का प्रतीक है, जिसमें यात्री लंबे समय तक नदी के किनारे-किनारे चलकर पूरी नदी की परिक्रमा करते हैं। माघ शुक्ल सप्तमी को भक्त घाटों पर इकट्ठा होते हैं, नर्मदा में स्नान करते हैं, दीपदान करते हैं और आरती करते हैं। इस दिन भक्ति के साथ उस नदी के प्रति कृतज्ञता भी जताई जाती है, जो धरती, बस्तियों और पीढ़ियों के सांस्कृतिक जीवन का पोषण करती है।
महत्व
नर्मदा जयंती का महत्व भक्ति में, परिवार की परंपरा में और इस दिन के आध्यात्मिक या ऋतु से जुड़े अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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