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पासओवर · पेसाच

Passover

अभी कोई नियम नहीं

इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।

इस परंपरा के जानकार चित्र की जाँच न कर लें, तब तक वह यहाँ नहीं दिखाया जाता।

संक्षेप में

पासओवर या पेसाच यहूदियों का आज़ादी का त्योहार है, जिसमें मिस्र की ग़ुलामी से छुटकारे की कथा फिर से सुनाई जाती है कि इस्राएली कठोर ग़ुलामी झेल रहे थे और मूसा ने फ़िरौन के सामने जाकर उनकी रिहाई माँगी।

कथा

पासओवर या पेसाच मिस्र की ग़ुलामी से निकलने की याद का यहूदी त्योहार है। तोरा की कथा है कि इस्राएली मिस्र में कठोर ग़ुलामी झेल रहे थे। मूसा ने फ़िरौन के सामने जाकर उनकी रिहाई माँगी। इसके बाद देश पर एक के बाद एक विपत्तियाँ आईं। आख़िरी विपत्ति से पहले इस्राएली घरों ने अपने दरवाज़ों पर निशान लगाए और जल्दी-जल्दी भोजन किया। विनाश उन घरों को छुए बिना आगे निकल गया, और त्योहार का नाम इसी ‘पास ओवर’ से है। आख़िर फ़िरौन ने लोगों को जाने दिया। वे समुद्र पार करके निकल गए, और वहीं से ईश्वर के साथ वाचा और एक राष्ट्र बनने की यात्रा शुरू हुई। त्योहार के केंद्र में सेडर है, यानी तय क्रम से होने वाला परिवार का भोजन। इसमें पाठ, सवालों, प्रतीक वाले व्यंजनों और गीतों के ज़रिये यह कथा फिर से कही जाती है। बिना ख़मीर की रोटी मत्ज़ा निकलते समय की जल्दबाज़ी याद दिलाती है, और कड़वी जड़ी-बूटियाँ ग़ुलामी की कड़वाहट। पासओवर इतिहास को हर व्यक्ति की अपनी याद बना देता है। हर पीढ़ी से कहा जाता है कि वह ख़ुद को ग़ुलामी से निकला हुआ माने, और आज़ादी, ज़िम्मेदारी और सताए हुए लोगों के प्रति करुणा का मूल्य समझे।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

पासओवर इसे मनाने वाले समाज के लिए अहम त्योहार है, और इससे धर्म, परिवार और संस्कृति की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी रहती है।

कैसे मनाते हैं

पूरे हफ़्ते ख़मीर वाली रोटी नहीं खाई जाती, और पहले घर में उसकी खोज होती है। सेडर की थाली में कड़वी जड़ी, नमक का पानी, एक हड्डी और ख़ारोसेत रखे जाते हैं। हर चीज़ खाई ही नहीं जाती, उसका अर्थ भी समझाया जाता है। वाइन के चार प्याले पिए जाते हैं, और पाँचवाँ भरकर रख दिया जाता है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

इज़राइल में यह त्योहार सात दिन चलता है, और बाहर बसे यहूदियों में आठ दिन। अश्केनाज़ी रिवाज़ में कित्नियोत, यानी चावल, मक्का और दालें भी नहीं खाई जातीं, जबकि सेफ़ार्दी और मिज़राही रिवाज़ में इनकी छूट है। इसलिए नियम एक होने पर भी अश्केनाज़ी और सेफ़ार्दी घरों में पासओवर का भोजन बहुत अलग दिख सकता है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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