
जयंतीभारतीय · हिंदू
राधाष्टमी
Radha Ashtami
अगली तारीख़
शनिवार, 19 सितंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल अष्टमी15:27 तक
- नक्षत्र
- मूलअगले दिन 01:42 तक
- मास
- भाद्रपद
- सूर्योदय
- 06:26सूर्यास्त 18:40
संक्षेप में
राधाष्टमी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
राधाष्टमी पर श्री राधा जी के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है। वैष्णव परंपराओं में राधा जी को भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त और निःस्वार्थ दिव्य प्रेम का साकार रूप माना जाता है। ब्रज की परंपरा में बरसाना और उसके आसपास का इलाक़ा राधा जी से ख़ास गहराई से जुड़ा है। वहाँ के मंदिरों में इस दिन अभिषेक होता है, सुंदर श्रृंगार होता है, कीर्तन होते हैं और राधा-कृष्ण की कथाओं का पाठ होता है। भक्ति साहित्य में राधाभाव ऐसे प्रेम को कहते हैं, जो बदले में कुछ नहीं माँगता और सिर्फ़ प्रिय के लिए ही होता है। इसीलिए यह त्योहार जितना जन्मदिन का है, उतना ही भक्ति के आदर्श का भी। राधाष्टमी जन्माष्टमी के पंद्रह दिन बाद, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को आती है। भक्त राधा जी की श्रीकृष्ण के साथ पूजा करते हैं, और भजन, मंत्र और मंदिरों के आयोजनों के ज़रिये ब्रज की लीलाओं को याद करते हैं।
महत्व
राधाष्टमी का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
उपवास
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले कई लोग यह व्रत भी रखते हैं, पर आधी रात नहीं, दोपहर में। दोपहर की पूजा के बाद पारण किया जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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