
त्योहारगुजराती · हिंदू
रक्षाबंधन
Raksha Bandhan
अगली तारीख़
सोमवार, 16 अगस्त 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी10:29 तक
- नक्षत्र
- श्रवण23:33 तक
- मास
- श्रावण
- सूर्योदय
- 06:15सूर्यास्त 19:12
संक्षेप में
रक्षाबंधन स्नेह और रक्षा के बंधन का त्योहार है, जिसे परंपरा से राखी बाँधकर मनाया जाता है।
कथा
रक्षाबंधन की जड़ में रक्षा-सूत्र का पुराना भाव है, और इसका अर्थ समझाने वाली कई कथाएँ हैं। भविष्य पुराण से जुड़ी कथा है कि देवताओं और असुरों के बीच लंबा युद्ध चला। तब बृहस्पति ने रक्षा का विधान बताया, और युद्ध पर जाने से पहले इंद्राणी शची ने इंद्र की कलाई पर मंत्र से पवित्र किया हुआ धागा बाँधा। दूसरी प्रचलित कथाएँ इस दिन को लक्ष्मी जी और राजा बलि से जोड़ती हैं। समय के साथ समाज में राखी ख़ास तौर पर भाई-बहन के स्नेह और ज़िम्मेदारी की निशानी बन गई। श्रावण पूर्णिमा को बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है, तिलक लगाती है और मुँह मीठा कराती है। भाई उपहार देता है और बहन का ध्यान रखने का वचन देता है। आज बहुत-से परिवार इस रक्षा को एकतरफ़ा नहीं, बल्कि दोनों ओर की ज़िम्मेदारी मानते हैं। कुछ इलाक़ों में पुरोहित और समाज के लोग धार्मिक अनुष्ठानों में भी रक्षा-सूत्र बाँधते हैं। इस तरह इस त्योहार में पारिवारिक स्नेह भी है, और आशीर्वाद, ज़िम्मेदारी और रक्षा का पुराना भाव भी।
Mahabharata (Vyasa) के आधार पर
महत्व
रक्षाबंधन भक्ति और पारिवारिक परंपरा का त्योहार है, जिसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।
कैसे मनाते हैं
बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है, माथे पर तिलक लगाती है और मुँह मीठा कराती है। भाई बहन को उपहार देता है, और पुराने रिवाज़ के अनुसार वचन भी देता है। राखी केवल सगे भाई को ही नहीं बाँधी जाती। गुजरात के समुद्र तट पर यही दिन नारियेली पूनम है। उस दिन समुद्र को नारियल अर्पित किया जाता है, और नावें फिर से समुद्र में उतरती हैं।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
यह त्योहार सबसे ज़्यादा उत्तर और पश्चिम भारत में मनाया जाता है। कोंकण तट पर यही दिन नारली पूर्णिमा है। दक्षिण में यह अवनि अवित्तम है, जब जनेऊ बदला जाता है। बंगाल में झूलन पूर्णिमा मनाई जाती है, जिसमें राधा जी और श्रीकृष्ण को झूले में झुलाया जाता है। राखी अब केवल सगे भाई-बहनों तक सीमित नहीं रही। यह बदलाव कोई पुराना क्षेत्रीय अंतर नहीं, बल्कि आज के बुज़ुर्गों की आँखों के सामने आया है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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