
एकादशीगुजराती · हिंदू
रमा एकादशी
Rama Ekadashi
अगली तारीख़
गुरुवार, 5 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण एकादशी10:36 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनीअगले दिन 03:55 तक
- मास
- कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
- सूर्योदय
- 06:45सूर्यास्त 18:00
संक्षेप में
रमा एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
रमा एकादशी की कथा राजा मुचुकुंद की पुत्री चंद्रभागा और उनके पति शोभन से जुड़ी है। मुचुकुंद के राज्य में एकादशी बहुत कड़ाई से रखी जाती थी। शोभन शरीर से कमज़ोर थे, इसलिए उन्हें डर था कि वे उपवास नहीं सह पाएँगे। फिर भी ससुराल जाने पर उन्होंने वहाँ का नियम निभाया, और कठिन उपवास के बाद उनकी मृत्यु हो गई। कथा है कि एकादशी के पुण्य से शोभन को एक भव्य दिव्य राज्य मिला। पर वह उपवास मन की पक्की श्रद्धा से नहीं हुआ था, इसलिए वह राज्य स्थिर नहीं था। बाद में एक ब्राह्मण शोभन से मिले और यह समाचार चंद्रभागा तक पहुँचाया। चंद्रभागा बचपन से श्रद्धा के साथ एकादशी करती आई थीं। उन्होंने अपने व्रतों का जमा पुण्य पति को अर्पित कर दिया, जिससे शोभन का दिव्य राज्य स्थिर हो गया और दोनों फिर मिल गए। कथा का सार यह है कि बाहर का तप सच्ची श्रद्धा से ही गहरा होता है, और एक व्यक्ति की निष्ठा भरी भक्ति दूसरे के कल्याण के लिए अर्पण बन सकती है।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
नाम अयोध्या के भगवान राम पर नहीं, रमा यानी माँ लक्ष्मी पर पड़ा है। यह दिवाली से चार दिन पहले आती है, और व्रत रखने वालों का दिवाली सप्ताह यहीं से शुरू होता है।
उपवास
यह एकादशी उसी सप्ताह आती है जब दिवाली के लिए घर की साफ़-सफ़ाई चल रही होती है, और लोगों को इसके बारे में ज़्यादातर यही याद रहता है। उपवास आम एकादशी जैसा ही होता है।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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