सभी त्योहार

व्रतगुजराती · हिंदू

रांधण छठ

Randhan Chhath

अगली तारीख़

सोमवार, 23 अगस्त 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण षष्ठी20:53 तक
नक्षत्र
अश्विनी12:11 तक
मास
भाद्रपदअमांत पंचांग में श्रावण
सूर्योदय
06:17सूर्यास्त 19:06
उस दिन का पंचांग खोलें

संक्षेप में

रांधण छठ हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

शीतला सातम से ठीक एक दिन पहले गुजराती घरों में तैयारी का दिन होता है, जिसे रांधण छठ कहते हैं। नाम में ही खाना पकाने की बात है। शीतला सातम पर घर का चूल्हा ठंडा रखने की परंपरा है, इसलिए छठ के दिन ही अगले दिन का खाना बना लिया जाता है। इस दिन रसोई में ख़ूब चहल-पहल रहती है। रोटला, पूरी, थेपला, मिठाई, सब्ज़ी और देर तक ठीक रहने वाले दूसरे पकवान बनते हैं। खाना बन जाने के बाद चूल्हा साफ़ किया जाता है, और कई घरों में उसे विधि से ठंडा किया जाता है। इसलिए रांधण छठ को शीतला माता की पूजा से अलग करके नहीं समझा जा सकता। शीतला माता ठंडक, रक्षा और सेहत से जुड़ी देवी हैं। अगले दिन परिवार चूल्हा जलाए बिना पहले से बना खाना खाता है। इस तरह रोज़ की रसोई तैयारी और संयम की एक विधि बन जाती है। साथ ही रोज़ खाना बनाने वाले को भी एक दिन ऐसा मिलता है, जब कुछ भी ताज़ा नहीं पकाना पड़ता।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

रांधण छठ का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक व मौसमी अर्थ में है।

Gujarati household practice के आधार पर

कैसे मनाते हैं

थेपला, पूरी, भजिया, सुखड़ी और वड़ा ढेर सारा बनाकर रख लिया जाता है। आख़िरी पकवान बनने के बाद चूल्हा साफ़ करके उस पर कुमकुम लगाया जाता है और उसकी पूजा होती है। शीतला सातम के बाद वाली सुबह तक चूल्हा फिर नहीं जलाया जाता।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

तिथि कैलेंडर आपके फ़ोन में

आपके अपने शहर का पंचांग, चौघड़िया, त्योहार और रिमाइंडर। ऐप इंटरनेट के बिना भी चलता है।