
त्योहारगुजराती · हिंदू
ऋषि पंचमी
Rishi Panchami
अगली तारीख़
बुधवार, 16 सितंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल पंचमी08:59 तक
- नक्षत्र
- विशाखा17:22 तक
- मास
- भाद्रपद
- सूर्योदय
- 06:25सूर्यास्त 18:43
संक्षेप में
ऋषि पंचमी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
ऋषि पंचमी सप्तर्षियों के प्रति श्रद्धा का व्रत है। ये सात ऋषि हैं कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ। पारंपरिक कथा ब्राह्मण उत्तंग, उनकी पत्नी सुशीला और उनकी विधवा बेटी की है। बेटी को एक अनजानी पीड़ा हुई, तब उत्तंग ने ध्यान लगाकर उसका कारण पिछले जन्म से जोड़ा। उस जन्म में शुद्धि के नियम नहीं निभाए गए थे, और बेटी ने ऋषि पंचमी व्रत की अनदेखी की थी। फिर उत्तंग ने परिवार को स्नान, पूजा, अर्घ्य, सादे भोजन और संयम भरे आचरण के साथ सात ऋषियों का पूजन करना सिखाया। इस पुरानी कथा में मासिक धर्म को लेकर पुराने ज़माने की शुद्धि की धारणाएँ दिखती हैं। आज बहुत से लोग इसे स्त्रियों पर फ़ैसले के रूप में नहीं, बल्कि उस समय के सांस्कृतिक संदर्भ में समझते हैं। ऋषि पंचमी का स्थायी भक्ति-भाव तो ज्ञान को सहेजने वाले ऋषियों के प्रति कृतज्ञता है। साथ ही यह अपनी भूलों, स्वच्छता, संयम और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति आदर पर विचार करने का अवसर है।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
ऋषि पंचमी का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
हल से उगाया हुआ कुछ भी नहीं खाया जाता। भोजन में सामा, मोरैया और बिना हल के उगने वाले दूसरे अनाज पकाए जाते हैं, और साथ में दूध और फल लिए जाते हैं। स्त्रियाँ सुबह अपामार्ग के पत्तों से स्नान करती हैं, और सात ऋषियों की एक पंक्ति में पूजा होती है।
Gujarati household practice के आधार पर
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