
व्रतभारतीय · हिंदू
सकट चौथ
Sakat Chauth · तिलकुट चौथ
अगली तारीख़
सोमवार, 25 जनवरी 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण तृतीया08:10 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा फाल्गुनीअगले दिन 01:02 तक
- मास
- माघअमांत पंचांग में पौष
- सूर्योदय
- 07:20सूर्यास्त 18:23
संक्षेप में
सकट चौथ हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
सकट चौथ को संकट चौथ या तिलकुट चौथ भी कहते हैं। माघ कृष्ण चतुर्थी (अमांत पंचांग में पौष) का यह व्रत मुख्य रूप से गणेश जी को समर्पित है और संतान के कल्याण के लिए रखा जाता है। उत्तर भारत में सुनाई जाने वाली एक प्रचलित कथा दो देवरानी-जेठानी की है। एक संपन्न थी और दूसरी ग़रीब, और दोनों की भक्ति व उदारता की परीक्षा होती है। दूसरी कथाओं में एक माँ की बात आती है, जिसकी सच्चे मन से की गई गणेश पूजा उसके बच्चे को संकट से बचाती है। कथा सुनाने का ढंग भले अलग हो, पर हर कथा में बात ‘संकट’ की है, यानी मुश्किल या ख़तरे की। आस्था यह है कि विनम्रता और परिवार की परवाह के साथ पूजा की जाए, तो गणेश जी विघ्न दूर करते हैं। सर्दियों के इस व्रत में तिल का ख़ास महत्व है। तिल की मिठाइयाँ और तिल से बना प्रसाद तैयार होता है, और इसी से इसका नाम तिलकुट चौथ पड़ा। माताएँ अक्सर कड़ा उपवास रखती हैं। वे गणेश जी की पूजा करके चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, और बच्चों की सेहत, सुरक्षा और लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं।
महत्व
सकट चौथ का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
उपवास
व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रहता है, और इस दिन चाँद देर से निकलता है। अर्घ्य के बाद तिल-गुड़ से व्रत खोला जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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