
दिवसभारतीय · हिंदू
सरस्वती पूजा (नवरात्रि)
Saraswati Puja (Navratri)
अभी कोई नियम नहीं
इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।
संक्षेप में
सरस्वती पूजा (नवरात्रि) हिंदू पंचांग के अनुसार की जाने वाली पूजा है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
नवरात्रि में होने वाली सरस्वती पूजा त्योहार के आख़िरी दिनों को विद्या, संगीत, कला और लगन से साधे गए हुनर की ओर मोड़ देती है। दक्षिण भारत और पश्चिम भारत की कई परंपराओं में किताबें, वाद्य, शिल्प के औज़ार और पढ़ाई की चीज़ें माँ सरस्वती के सामने आदर से सजाई जाती हैं। कुछ दिनों तक इनका रोज़ का इस्तेमाल बंद रहता है। इस विधि में विद्या को ही पवित्र माना जाता है। हर हुनर के पीछे गुरु, अभ्यास और एकाग्रता होती है, इस बात को भी मान दिया जाता है। क्षेत्र के रिवाज के अनुसार सरस्वती आवाहन पहले शुरू हो सकता है, और मुख्य पूजा नवरात्रि के तय दिन होती है। फिर विजयादशमी को पढ़ाई या काम दोबारा शुरू किया जाता है। कुछ जगहों पर विद्यारंभ संस्कार के साथ बच्चों को पहली बार अक्षर सिखाए जाते हैं। यह पूजा नवरात्रि को सोच-विचार का एक पहलू भी देती है। शक्ति तभी पूरी होती है, जब उसे विद्या, संस्कार और अपनी प्रतिभा के समझदारी भरे उपयोग की दिशा मिले।
महत्व
सरस्वती पूजा का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
अलग-अलग इलाक़ों में
इस ऐप में इस पूजा का नियम नहीं है। इसका दिन तिथियों के एक दायरे में पड़ने वाले नक्षत्र से तय होता है, जबकि ऐप का नक्षत्र वाला नियम सौर महीने के भीतर का नक्षत्र देखता है। इसलिए ग़लत तारीख़ के बजाय कोई तारीख़ नहीं दी गई।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
तिथि कैलेंडर आपके फ़ोन में
आपके अपने शहर का पंचांग, चौघड़िया, त्योहार और रिमाइंडर। ऐप इंटरनेट के बिना भी चलता है।