
संक्षेप में
शामळाजी में मेश्वो के किनारे पखवाड़े भर चलने वाला यह मेला उत्तर गुजरात का सबसे बड़ा आदिवासी जमावड़ा है।
कथा
शामळाजी में भगवान श्रीकृष्ण साँवले मुख वाले शामळिया के रूप में विराजते हैं। उनका मंदिर अरावली की पहाड़ियों में मेश्वो नदी के ऊपर बना है। कार्तिक पूर्णिमा के आसपास यहाँ लगभग पखवाड़े भर मेला लगता है। इसमें सबसे ज़्यादा भील और गरासिया परिवार आते हैं, जो राजस्थान की सीमा के दोनों ओर की पहाड़ियों से आते हैं। उनके लिए यहाँ तक पहुँचना ही भक्ति है। वे पैदल और बैलगाड़ियों में आते हैं, नदी किनारे डेरा डालते हैं, मेश्वो में स्नान करते हैं और भगवान के दर्शन करते हैं।
महत्व
शामळाजी वैष्णव मंदिर है, फिर भी इसका मेला क़स्बे से ज़्यादा आसपास के आदिवासी समाज का है। ऐसा कम ही होता है, और इसीलिए यहाँ मेला मंदिर से भी बड़ा है।
कैसे मनाते हैं
दर्शन से पहले मेश्वो में स्नान होता है, और किनारे पर डाला गया डेरा सिर्फ़ सुविधा नहीं, मेले का ही हिस्सा है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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