
मेलाभारतीय · हिंदू
श्रावणी मेला
Shravani Mela · कांवड़ मेला
अगली तारीख़
रविवार, 18 जुलाई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- पूर्णिमा21:14 तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढा11:17 तक
- मास
- आषाढ
- सूर्योदय
- 06:03सूर्यास्त 19:28
संक्षेप में
भक्त कंधे पर कांवड़ में गंगाजल लेकर नंगे पाँव 105 किलोमीटर पैदल चलते हैं।
कथा
सुल्तानगंज में गंगा से जल भरकर देवघर के शिव मंदिर तक ले जाया जाता है, और रास्ते में उसे कहीं नीचे नहीं रखा जाता। सुस्ताने के लिए कांवड़ ज़मीन पर नहीं, स्टैंड पर टिकाई जाती है, और यात्री पाँव में कुछ नहीं पहनते। दूरी 105 किलोमीटर की है, और ज़्यादातर लोगों को तीन-चार दिन लगते हैं। आषाढ पूर्णिमा के बाद पूरे श्रावण महीने यह रास्ता भगवा पहने यात्रियों की अटूट क़तार से भरा रहता है, और देवघर में लाखों यात्री पहुँचते हैं।
महत्व
यहाँ महत्व पहुँचने का नहीं, चलने का है। लंबी दूरी, नंगे पाँव, ज़मीन पर न रखा जाने वाला जल-पात्र, इस यात्रा में जो कुछ कठिन है, वही अर्पण है।
उपवास
बहुत से यात्री दिन में एक ही बार भोजन करके चलते हैं। जो यह नियम निभाते हैं, वे पूरे महीने मांस, शराब और प्याज़ छोड़ देते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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