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जयंतीभारतीय · हिंदू

सीता नवमी

Sita Navami · सीता जयंती

अगली तारीख़

शुक्रवार, 14 मई 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल नवमी19:39 तक
नक्षत्र
मघा12:42 तक
मास
वैशाख
सूर्योदय
05:58सूर्यास्त 19:14
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संक्षेप में

सीता नवमी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

सीता नवमी, जिसे जानकी नवमी भी कहते हैं, माता सीता के प्राकट्य का दिन है। रामायण की कथा है कि मिथिला के राजा जनक एक पवित्र यज्ञ की तैयारी के लिए खेत जोत रहे थे, तभी उन्हें एक नन्ही बच्ची मिली। वे हल की रेखा से प्रकट हुई थीं, इसलिए उनका नाम सीता पड़ा। राजा जनक और रानी सुनयना ने उन्हें बेटी की तरह पाला। स्वयंवर में श्रीराम ने भगवान शिव का महान धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई, और फिर सीता जी का विवाह श्रीराम से हुआ। रामायण में सीता जी की भक्ति, वनवास में उनका साहस, लंका में उनकी सहनशक्ति और धर्म के प्रति उनकी अडिग निष्ठा सामने आती है। इसी जीवन ने उन्हें पतिव्रता धर्म के साथ-साथ शक्ति का भी स्थायी आदर्श बनाया। भक्त वैशाख शुक्ल नवमी को उनका स्मरण करते हैं, और परिवार में मेल, मान-मर्यादा और मुश्किल में टिके रहने की शक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

महत्व

सीता नवमी का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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