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तरणेतर मेला

Tarnetar Mela · त्रिनेत्रेश्वर मेला

अगली तारीख़

शनिवार, 4 सितंबर 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल चतुर्थी12:26 तक
नक्षत्र
चित्रा14:49 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:21सूर्यास्त 18:55
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संक्षेप में

त्रिनेत्रेश्वर के तीन दिन के मेले में युवक कढ़ाई वाली छतरी लेकर घूमता है, जो बताती है कि उसे दुल्हन की तलाश है।

कथा

तरणेतर गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले का एक छोटा-सा गाँव है, जहाँ त्रिनेत्रेश्वर महादेव का मंदिर है। परंपरा के अनुसार द्रौपदी का स्वयंवर यहीं हुआ था। उस स्वयंवर में घूमती मछली का प्रतिबिंब देखकर उसे भेदने की परीक्षा थी। उसी कथा के इर्द-गिर्द बना यह मेला आज भी विवाह का मेला है। विवाह योग्य भरवाड़ या रबारी युवक हाथ में छतरी लेकर घूमता है। इस छतरी पर उसने या उसके परिवार ने पूरे साल कढ़ाई की होती है, और यही छतरी उसकी घोषणा है। लड़कियाँ देखती हैं, परिवार बात चलाते हैं, और बाक़ी तीन दिन मंदिर के कुंड के आसपास रास, हूडो और मेले का शोर-शराबा रहता है।

महत्व

तरणेतर मेला गुजरात के उन आख़िरी मेलों में से है, जहाँ मेले का मूल उद्देश्य आज भी सचमुच वही है। अब यह कढ़ाई संग्रह की जाती है और प्रदर्शनियों में रखी जाती है, जो दिखाता है कि यह सब कितनी जल्दी बदल सकता है।

कैसे मनाते हैं

पहले दिन सुबह त्रिनेत्रेश्वर के कुंड में स्नान होता है। छतरी किसी स्टॉल पर सजाकर नहीं रखी जाती, बल्कि हाथ में लेकर मेले के पूरे मैदान में घुमाई जाती है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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