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उत्तरायण · मकर संक्रांति

Uttarayan / Makar Sankranti

अगली तारीख़

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल सप्तमी14:13 तक
नक्षत्र
रेवती23:50 तक
मास
पौष
सूर्योदय
07:21सूर्यास्त 18:16
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संक्षेप में

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के दिन, यानी मकर संक्रांति पर, गुजरात पतंग उड़ाकर उत्तरायण मनाता है।

कथा

मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, और गुजरात इस दिन को उत्तरायण के रूप में धूमधाम से मनाता है। परंपरा इस दिन को सूर्य की उत्तर दिशा की ओर यात्रा और मौसम के बदलाव से जोड़ती है। कई हिंदू त्योहार तिथि से तय होते हैं, पर संक्रांति सूर्य की गणना से आती है। इसीलिए यह हर साल आम तौर पर जनवरी के बीच में ही पड़ती है। देश के अलग-अलग हिस्से इस दिन को अलग-अलग नामों और रीतियों से मनाते हैं, पर गुजरात में इसकी पहचान पतंगों से भरा आसमान है। सुबह-सुबह पूरा परिवार छत पर पहुँच जाता है। पतंगें उड़ती हैं, पड़ोस की छतों को आवाज़ें लगाई जाती हैं, और उंधियू, जलेबी, चिक्की और तिल के पकवान मिल-बाँटकर खाए जाते हैं। अगले दिन कई जगह वासी उत्तरायण मनाया जाता है। इस त्योहार में मौसम बदलने की निशानी भी है, फ़सल के लिए आभार भी, सबका मिलना-जुलना भी और लंबे, उजले दिनों के आने की ख़ुशी भी। गुजरात से यह इतना जुड़ गया है कि आज उत्तरायण राज्य के सबसे जाने-पहचाने सार्वजनिक त्योहारों में गिना जाता है।

Mahabharata (Vyasa) के आधार पर

महत्व

उत्तरायण या मकर संक्रांति का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

Gujarati household practice के आधार पर

कैसे मनाते हैं

इस दिन पूरा गुजरात छतों पर होता है। पौ फटते ही पतंगें चढ़ जाती हैं और अँधेरा होने तक उड़ती रहती हैं। किसी की पतंग कटती है तो 'काई पो छे' की हाँक लगती है, और अहमदाबाद और सूरत में दिन भर यही आवाज़ गूँजती है। उंधियू और जलेबी खाई जाती है, तिल और गुड़ बाँटे जाते हैं, और सूरज ढलने के बाद आसमान में कंदीलें उड़ाई जाती हैं। दूसरा दिन वासी उत्तरायण का होता है। उस दिन भी वही सब होता है, बस खाना पिछले दिन का होता है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

लगभग पूरे देश में यह दिन मकर संक्रांति कहलाता है। गुजरात में यह उत्तरायण है, जहाँ पूरा दिन पतंग के नाम रहता है। तमिलनाडु में चार दिन का पोंगल होता है, असम में दावत और अलाव के साथ माघ बिहू, पंजाब में एक शाम पहले लोहड़ी और बंगाल में पौष संक्रांति। यह सौर वर्ष से बँधे गिने-चुने त्योहारों में से एक है, इसीलिए जनवरी में इसकी तारीख़ मुश्किल से खिसकती है।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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