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जयंतीगुजराती · हिंदू

वामन जयंती

Vamana Jayanti

अगली तारीख़

बुधवार, 23 सितंबर 2026

7 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल द्वादशी22:50 तक
नक्षत्र
श्रवण09:08 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:27सूर्यास्त 18:36
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संक्षेप में

वामन जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

वामन जयंती पर भगवान विष्णु के वामन अवतार, यानी छोटे कद के ब्राह्मण रूप, और दानवीर राजा महाबलि की कथा याद की जाती है। बलि का राज तीनों लोकों में फैल गया था, फिर भी वे दान देने और वचन निभाने के लिए प्रसिद्ध थे। राजा बलि यज्ञ कर रहे थे, तब भगवान विष्णु छोटे-से ब्रह्मचारी वामन बनकर वहाँ पहुँचे, और केवल उतनी भूमि माँगी जितनी तीन पग में आ जाए। बलि के हाँ कहते ही वामन भगवान ने विराट त्रिविक्रम रूप धारण किया। एक पग में उन्होंने धरती नाप ली और दूसरे में स्वर्ग। तीसरा पग रखने की जगह नहीं बची, तब बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने यह समर्पण स्वीकार किया और बलि को पाताल लोक भेजा, पर साथ ही उनकी भक्ति और उदारता का मान भी रखा। यह कथा सांसारिक सत्ता की सीमा, दिए हुए वचन की पवित्रता और भगवान के सामने विनम्रता की बात कहती है। केरल के ओणम से यह कथा गहराई से जुड़ी है। वहाँ हर साल महाबलि के लौटने का उत्सव बड़े प्रेम से मनाया जाता है।

महत्व

वामन जयंती का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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