
जयंतीगुजराती · हिंदू
वराह जयंती
Varaha Jayanti
अगली तारीख़
शुक्रवार, 3 सितंबर 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल तृतीया14:19 तक
- नक्षत्र
- हस्त15:53 तक
- मास
- भाद्रपद
- सूर्योदय
- 06:21सूर्यास्त 18:56
संक्षेप में
वराह जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
वराह जयंती भगवान विष्णु के वराह अवतार की जयंती है। वराह यानी शूकर। पुराणों में कथा है कि हिरण्याक्ष नाम का दैत्य पृथ्वी को ब्रह्मांड के महाजल में खींच ले गया। इस कथा में पृथ्वी भूदेवी के रूप में हैं। तब भगवान विष्णु ने बलशाली वराह का रूप धारण किया। वे गहरे जल में उतरे, हिरण्याक्ष से युद्ध किया, और पृथ्वी को अपने दाँतों पर उठाकर फिर से उसकी जगह पर स्थापित किया। भूदेवी को उठाए वराह की छवि भगवान विष्णु के सबसे प्रभावशाली प्रतीकों में से एक बन गई, जो दिखाती है कि भगवान सृष्टि की व्यवस्था फिर से स्थापित करते हैं। यह कथा सिर्फ़ दैत्य को हराने की नहीं है। जब संतुलन बुरी तरह बिगड़ जाए, तब पूरी सृष्टि को बचा लेने की यह कथा है। भक्त इस दिन वराह रूप में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, दशावतार की कथाएँ पढ़ते हैं, और पृथ्वी की रक्षा करने तथा धर्म निभाने के अपने कर्तव्य को याद करते हैं। वराह के मंदिरों में इस प्रसंग के कई क्षेत्रीय रूप सहेजे गए हैं, पर भूदेवी को बचाने की बात हर जगह केंद्र में रहती है।
महत्व
वराह जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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