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व्रतभारतीय · हिंदू

वरलक्ष्मी व्रत

Varalakshmi Vrat

अभी कोई नियम नहीं

इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।

संक्षेप में

वरलक्ष्मी व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

वरलक्ष्मी व्रत वर देने वाली माँ लक्ष्मी के ‘वरलक्ष्मी’ स्वरूप को समर्पित है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इसे ख़ास तौर पर विवाहित स्त्रियाँ रखती हैं। इसकी प्रचलित व्रत कथा चारुमती नाम की एक गुणवती स्त्री की है। सपने में माँ लक्ष्मी ने उसे श्रावण मास के एक शुक्रवार को यह पूजा करने को कहा। चारुमती ने दूसरी स्त्रियों के साथ मिलकर वैसे ही पूजा की, और सजे हुए कलश को माँ का स्वरूप मानकर पूजा। कथा कहती है कि उन सबके घर समृद्धि और सुख से भर गए। यह व्रत धन को केवल पैसे के रूप में नहीं देखता। यह समृद्धि को शुभ पारिवारिक जीवन, उदारता और नियम से की गई भक्ति से जोड़ता है। घर की सफ़ाई होती है, कलश सजाया जाता है, फूल और नैवेद्य चढ़ाकर माँ लक्ष्मी का आवाहन होता है, और पूजा के बाद अक्सर पवित्र धागा बाँधा जाता है।

महत्व

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

अलग-अलग इलाक़ों में

इस ऐप में अभी इसका नियम नहीं है। तारीख़ पूर्णिमा के हिसाब से एक वार से तय होती है, और ऐप के नियमों में वार नहीं बताया जा सकता। इसलिए ग़लत तारीख़ के बजाय यहाँ कोई तारीख़ नहीं दी गई है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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