
त्योहारगुजराती · हिंदू
वसंत पंचमी
Vasant Panchami
अगली तारीख़
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
संक्षेप में
वसंत पंचमी पर वसंत ऋतु का स्वागत होता है, और यह दिन माँ सरस्वती की पूजा से जुड़ा है।
कथा
वसंत पंचमी पर वसंत ऋतु की पहली आहट मिलती है। यह दिन ख़ास तौर पर विद्या, संगीत, भाषा और कला की देवी माँ सरस्वती से जुड़ा है। कई परंपराओं में इस दिन को माँ सरस्वती के प्राकट्य या जन्म का उत्सव माना जाता है। इसीलिए विद्यार्थी अपनी किताबें, वाद्य और पढ़ाई का सामान माँ के सामने रखते हैं और मन व बुद्धि निर्मल रहने की प्रार्थना करते हैं। सरसों के पीले फूल, पकते खेत और वसंत की धूप, इन सबका पीला रंग इस त्योहार का रंग बन गया है। यही रंग कपड़ों में भी दिखता है और खाने में भी। पूर्वी भारत में यह दिन सरस्वती पूजा के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, और कुछ दूसरे क्षेत्रों में इसे श्री पंचमी भी कहते हैं। यह त्योहार मौसम के बदलाव को इस विचार से जोड़ता है कि ज्ञान, रचनात्मकता और अनुशासित पढ़ाई भी लगातार नई होती रहनी चाहिए।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
वसंत पंचमी का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
इस दिन पीले कपड़े पहने जाते हैं और पीले पकवान खाए जाते हैं। किताबें, क़लम और वाद्य माँ सरस्वती के सामने रखे जाते हैं, और पूरे दिन उनका इस्तेमाल नहीं होता। स्कूलों और संगीत की कक्षाओं में सुबह पूजा होती है। अक्सर तीन-चार साल के बच्चे को स्लेट देकर उससे पहला अक्षर लिखवाया जाता है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
बंगाल में यह दिन सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है। वहाँ यह स्कूल-कॉलेजों का साल का सबसे बड़ा त्योहार है, पंडाल सजते हैं और माँ की प्रतिमा के चरणों में पहला अक्षर लिखवाया जाता है। पंजाब में पतंगें उड़ती हैं। दक्षिण भारत में सरस्वती की पूजा नवरात्रि में होती है, इसलिए वहाँ यह दिन सादगी से बीत जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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