
एकादशीगुजराती · हिंदू
विजया एकादशी
Vijaya Ekadashi
अगली तारीख़
बुधवार, 3 मार्च 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण एकादशीअगले दिन 07:24 तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढा22:34 तक
- मास
- फाल्गुनअमांत पंचांग में माघ
- सूर्योदय
- 06:58सूर्यास्त 18:44
संक्षेप में
विजया एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी का व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
विजया एकादशी की कथा भगवान राम की लंका यात्रा से जुड़ी है। भगवान राम, लक्ष्मण जी और वानर सेना समुद्र के किनारे पहुँचे, तो अथाह समुद्र रावण के राज्य की ओर जाने के रास्ते में खड़ा था। भगवान राम ने बकदाल्भ्य ऋषि से मार्गदर्शन माँगा। ऋषि ने उन्हें फाल्गुन कृष्ण एकादशी (अमांत पंचांग में माघ) का व्रत संयम से पूजा और उपवास के साथ रखने की सलाह दी। भगवान राम और पूरी सेना ने यह व्रत रखा। कथा कहती है कि व्रत के पुण्य से उन्हें समुद्र पार करने में और आगे के युद्ध में सफलता मिली। यह व्रत कथा रामायण में आने वाली सेतु बाँधने और पराक्रम की कथा की जगह नहीं लेती। व्रत की परंपरा इस घटना के सहारे बस यह सिखाती है कि बड़ा काम शुरू करने से पहले विनम्रता, सही सलाह और आध्यात्मिक तैयारी ज़रूरी है। 'विजया' का अर्थ है विजय। इसलिए भक्त केवल शत्रु को हराने के लिए नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के मार्गदर्शन में धर्म के रास्ते पर चलकर बाधाओं, डर और अपनी कमज़ोरियों पर जीत पाने के लिए प्रार्थना करते हैं।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
मान्यता है कि लंका जाने के लिए समुद्र पार करने से पहले भगवान राम ने यह व्रत रखा था, और उसके बाद मिली विजय से इसका नाम विजया पड़ा। कोई कठिन काम हाथ में लेना हो, तब यह व्रत रखा जाता है।
उपवास
यह फाल्गुन कृष्ण एकादशी (अमांत पंचांग में माघ) है। जो काम सफल होना ही चाहिए, उससे पहले रखी जाती है। कथा में भगवान राम ने लंका जाने से पहले इसे रखा था।
Gujarati household practice के आधार पर
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