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एकादशीगुजराती · हिंदू

योगिनी एकादशी

Yogini Ekadashi

अगली तारीख़

बुधवार, 30 जून 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण एकादशी20:31 तक
नक्षत्र
भरणी21:01 तक
मास
आषाढअमांत पंचांग में ज्येष्ठ
सूर्योदय
05:56सूर्यास्त 19:30
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संक्षेप में

योगिनी एकादशी हिंदू पंचांग का एक एकादशी व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

योगिनी एकादशी की पारंपरिक कथा हेममाली नाम के यक्ष की है, जो कुबेर की सेवा में था। भगवान शिव की पूजा के लिए फूल लाना हेममाली का काम था। पर एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ ऐसा खो गया कि सेवा ही भूल गया। कर्तव्य में इस चूक से कुबेर क्रोधित हो उठे। उन्होंने हेममाली को शाप दिया कि उसका सुख भरा जीवन छिन जाएगा और उसे गंभीर रोग होगा। हेममाली अलकापुरी से दूर दुख में भटकता रहा। लंबे समय तक कष्ट सहने के बाद वह मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुँचा, और जो हुआ था वह ईमानदारी से बता दिया। ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। हेममाली ने भक्ति भाव से व्रत रखा। कथा कहती है कि वह शाप से मुक्त हुआ और फिर से पहले जैसा हो गया। इस कथा की सीख साफ़ है। प्रेम या आनंद को बुरा नहीं कहा गया, पर सौंपी गई ज़िम्मेदारी भूलने का फल भुगतना पड़ता है। संयम, पश्चाताप और भगवान विष्णु की भक्ति से जीवन फिर संतुलन में आता है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

इससे कोढ़ के शाप से मुक्ति की कथा जुड़ी है, इसलिए यह और एकादशियों से ज़्यादा शरीर के रोग से छुटकारे के लिए रखी जाती है। यह कृष्ण पक्ष में, बरसात की पहली उमस में आती है।

उपवास

यह आषाढ कृष्ण एकादशी (अमांत पंचांग में ज्येष्ठ) है। त्वचा रोग से छुटकारे के लिए रखी जाती है, और कथा एक माली की है जिसे लापरवाही पर ऐसे ही रोग का शाप मिला था।

Gujarati household practice के आधार पर

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