दिवसगुजराती · हिंदू
अगस्त्य अर्घ्य
Agastya Arghya · अगस्त्य अर्घ्य दान
अभी कोई नियम नहीं
इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।
संक्षेप में
अगस्त्य अर्घ्य हिंदू पंचांग का एक विशेष दिन है, जिसकी तारीख़ और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
अगस्त्य अर्घ्य एक ऐसा धार्मिक अनुष्ठान है, जिसका संबंध आकाश के एक तारे से है। दक्षिणी आकाश का चमकीला तारा अगस्त्य साल में पहली बार भोर में दिखाई देता है, और यह अनुष्ठान उसी से जुड़ा है। आधुनिक खगोल विज्ञान में इस तारे को कैनोपस कहते हैं। हिंदू परंपरा में अगस्त्य मुनि का स्थान अनोखा है। कथाएँ कहती हैं कि वैदिक ज्ञान को वे दक्षिण ले गए। जब सब देवता उत्तर में इकट्ठा हुए, तब उन्होंने पृथ्वी का संतुलन साधा। उन्होंने विंध्य पर्वत का घमंड तोड़ा, और समुद्र में छिपे असुरों को बाहर लाने के लिए पूरा समुद्र पी गए। यह तारा दक्षिणी आकाश में चमकता हुआ उगता है, इसलिए इसका नाम मुनि से जुड़ा और यह मौसम बदलने का संकेत भी माना गया। अगस्त्य को अर्घ्य, यानी जल और प्रणाम, देने का सही समय पंचांग परंपरा किसी सीधी-सादी तिथि से नहीं, बल्कि तारे के दिखने के आधार पर निकालती है। इस परंपरा में खगोल, मौसम की समझ और ऋषि-पूजा एक साथ हैं। यह उस समय की याद दिलाती है, जब बड़े तारों की चाल पूजा-पाठ का भी हिस्सा थी और पंचांग के व्यावहारिक ज्ञान का भी।
महत्व
अगस्त्य अर्घ्य भक्ति और पारिवारिक परंपरा का दिन है, जिसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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