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अक्षय तृतीया

Akshaya Tritiya

अगली तारीख़

रविवार, 9 मई 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल तृतीया09:03 तक
नक्षत्र
मृगशिरा19:59 तक
मास
वैशाख
सूर्योदय
06:00सूर्यास्त 19:11
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संक्षेप में

अक्षय तृतीया दान, पूजा और नए अच्छे कामों की शुरुआत के लिए शुभ दिन माना जाता है।

कथा

अक्षय तृतीया की कोई एक कथा नहीं है। इस दिन से हिंदू परंपरा की कई कथाएँ जुड़ी हैं। “अक्षय” का अर्थ है जो कभी घटे नहीं, इसलिए मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कामों का पुण्य कभी कम नहीं होता। पुराणों और महाकाव्यों की परंपरा इस तिथि को कई घटनाओं से जोड़ती है। इसी दिन भगवान परशुराम प्रकट हुए, व्यास जी ने गणेश जी के सामने महाभारत की कथा कहनी शुरू की, और पांडवों के वनवास के समय युधिष्ठिर को कभी खाली न होने वाला अक्षय पात्र मिला। अलग-अलग इलाक़ों में अलग-अलग कथा पर ज़ोर दिया जाता है, पर सबमें एक ही भाव है कि समृद्धि धर्म से जुड़ी रहे। परिवार भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं, अन्न या जल का दान करते हैं और पूर्वजों को याद करते हैं। इस दिन पढ़ाई या कोई नया अच्छा काम शुरू किया जाता है, और कई समुदायों में नई ख़रीदारी या नया व्यापार भी इसी शुभ दिन शुरू होता है।

Mahabharata (Vyasa) के आधार पर

महत्व

अक्षय तृतीया का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

कैसे मनाते हैं

इस दिन मुहूर्त नहीं देखा जाता, क्योंकि पूरा दिन ही अबूझ मुहूर्त माना जाता है। सोना ख़रीदा जाता है, विवाह होते हैं, नए कारोबार शुरू होते हैं और भवन निर्माण की नींव रखी जाती है। जौ और जल का दान किया जाता है। गुजरात में इसे अखात्रीज भी कहते हैं, और जो लोग साल में एक बार पूरी भगवद् गीता पढ़ते हैं, वे इसी दिन से पाठ शुरू करते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

जैनों के लिए यह वह दिन है जब भगवान ऋषभदेव ने गन्ने के रस से साल भर का उपवास खोला, और वर्षीतप का पारणा भी इसी दिन होता है। ओडिशा में इसी दिन से रथयात्रा के रथ बनने लगते हैं और साल की पहली बुवाई होती है। दक्षिण में इसे सिंह या अक्षय तदिया कहते हैं, और सोने की ख़रीदारी वहाँ भी उतनी ही ज़ोरों पर होती है। पुरी में इसी दिन चंदन यात्रा शुरू होती है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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