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एकादशीगुजराती · हिंदू

आमलकी एकादशी

Amalaki Ekadashi

अगली तारीख़

गुरुवार, 18 मार्च 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल एकादशीअगले दिन 01:51 तक
नक्षत्र
पुष्यअगले दिन 03:20 तक
मास
फाल्गुन
सूर्योदय
06:45सूर्यास्त 18:51
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संक्षेप में

आमलकी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

आमलकी एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति और आँवले के पेड़ की पूजा से जुड़ी है। कथा है कि राजा चैत्ररथ का राज्य बहुत समृद्ध था। राजा और प्रजा सब मिलकर यह एकादशी व्रत रखते थे। वे भगवान विष्णु और पवित्र आँवले की पूजा करते और रात भर जागरण करते। एक बार एक भूखा शिकारी खाने की तलाश में वहाँ आ पहुँचा और पास ही बैठ गया। पूरी रात उसने भजन और कथा सुनी, और कुछ नहीं खाया। उसने व्रत रखने की सोची भी नहीं थी, फिर भी अनजाने में हुए उस उपवास और जागरण का पुण्य उसे मिला। कथा कहती है कि उस पुण्य से उसका अगला जन्म बदल गया। अगले जन्म में वह राजा वसुरथ बना। एक बार जंगल में शत्रुओं ने उस पर हमला किया, तब एकादशी के पुण्य से प्रकट हुई दैवी शक्ति ने उसकी रक्षा की। इस कथा का सार यह है कि भगवान विष्णु का सच्चे मन से किया गया स्मरण, चाहे अचानक ही शुरू हुआ हो, इंसान के जीवन की दिशा बदल सकता है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

इस दिन आँवले के पेड़ की पूजा होती है, और मान्यता है कि आज भगवान विष्णु उसमें वास करते हैं। यह फाल्गुन में होली से कुछ दिन पहले आती है, और ब्रज में रंग यहीं से शुरू हो जाता है।

उपवास

जहाँ आँवले का पेड़ हो, वहाँ व्रत उसी के नीचे रखा जाता है और पूजा उसकी जड़ के पास होती है। अगली सुबह आँवला खाकर पारण होता है। यह उन गिनी-चुनी एकादशियों में से है जिनमें कुछ छोड़ना नहीं, बल्कि कहीं जाना होता है।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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