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अनंत चतुर्दशी

Anant Chaturdashi

अगली तारीख़

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

9 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल चतुर्दशी23:07 तक
नक्षत्र
शतभिषा11:22 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:28सूर्यास्त 18:34
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संक्षेप में

अनंत चतुर्दशी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत रूप को समर्पित है। इसकी व्रत कथा सुशीला और उनके पति ऋषि कौंडिन्य की है। कथा है कि नदी किनारे कुछ स्त्रियाँ पूजा कर रही थीं। उनसे सुशीला ने अनंत व्रत सीखा और पूजा के बाद चौदह गाँठों वाला पवित्र धागा बाँधा। ऋषि कौंडिन्य उस धागे का अर्थ नहीं समझ पाए। उन्होंने ग़ुस्से में धागा उतारकर जला दिया। इसके बाद घर की सुख-समृद्धि जाती रही। कौंडिन्य को लगा कि व्रत के अनादर के कारण ही यह दुर्दशा हुई है। वे अनंत भगवान को खोजने लंबी यात्रा पर निकले और अपनी भूल पर पछताए। आख़िर में उन्होंने विधि से व्रत किया, तब जाकर उनके दिन फिरे। यह कथा युधिष्ठिर को भी सुनाई गई है। पांडवों के कठिन दिनों में श्रीकृष्ण उन्हें अनंत व्रत करने की सलाह देते हैं। इसलिए यह दिन धैर्य, विनम्रता और इस आस्था का प्रतीक है कि भगवान विष्णु सदा साथ रहकर संभालते हैं। कई जगह यही दिन गणेशोत्सव का आख़िरी बड़ा दिन भी होता है, जब गणेश विसर्जन होता है।

Mahabharata (Vyasa) के आधार पर

महत्व

अनंत चतुर्दशी भक्ति और पारिवारिक परंपरा के साथ मनाई जाती है, और इस दिन का आध्यात्मिक तथा मौसम से जुड़ा अर्थ भी अहम माना जाता है।

कैसे मनाते हैं

सूत या रेशम का चौदह गाँठों वाला धागा पूजकर बाँधा जाता है। पुरुष के दाहिने हाथ पर और स्त्री के बाएँ हाथ पर इसे बाँधते हैं, और साल भर रखते हैं। चढ़ाई जाने वाली हर चीज़ चौदह की संख्या में होती है। उसी दिन गणेश विसर्जन के जुलूस निकलते हैं। गुजरात में दोनों इतने घुल-मिल गए हैं कि ज़्यादातर लोग इस दिन को सिर्फ़ विसर्जन के दिन के रूप में जानते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

गणेश विसर्जन मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में होता है। धागे वाला अनंत व्रत कहीं ज़्यादा इलाक़ों में, बिना धूमधाम के रखा जाता है। दिगंबर जैन परंपरा में यह दिन पर्युषण का आख़िरी दिन है। यह क्षमावाणी से जुड़ा है, जब सबसे क्षमा माँगी जाती है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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