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चोपड़ा पूजन

Chopda Puja · चोपड़ा पूजा

अगली तारीख़

रविवार, 8 नवंबर 2026

53 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण चतुर्दशी11:28 तक
नक्षत्र
स्वातिअगले दिन 07:23 तक
मास
कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
सूर्योदय
06:47सूर्यास्त 17:59
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संक्षेप में

दीवाली के मौक़े पर गुजराती व्यापारी परिवार परंपरा के अनुसार हिसाब की बहियों की पूजा करके नए बही-खाते शुरू करते हैं।

कथा

चोपड़ा पूजन दीवाली पर गुजरात की अपनी ख़ास परंपरा है, जिसमें हिसाब की नई बहियों, खातों और कारोबार के साधनों की पूजा होती है। पुराने समय में व्यापारी बीते साल के खाते बंद करते थे और पूजा के बाद नए ‘चोपड़े’ खोलते थे। समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी की, शुभ शुरुआत के लिए गणेश जी की और धन का समझदारी से उपयोग करने की बुद्धि के लिए माँ शारदा यानी सरस्वती की पूजा होती थी। नए बही-खातों पर ‘श्री’ और ‘शुभ-लाभ’ लिखा जाता है और स्वस्तिक बनाया जाता है। व्यापारी परिवार प्रार्थना करते हैं कि नया साल ईमानदार मेहनत, सही समझ और हक़ की कमाई लेकर आए। आज कई कारोबारी भगवान के सामने लैपटॉप, रजिस्टर या डिजिटल हिसाब भी रखते हैं, पर भाव वही है कि कमाई की शुरुआत कृतज्ञता, अनुशासन और नैतिकता से होनी चाहिए। दीवाली के ठीक बाद गुजराती नया साल शुरू होता है, इसलिए चोपड़ा पूजन कारोबार के एक साल को धार्मिक रीति से विदा करने और अगले साल की तैयारी का मौक़ा भी है।

महत्व

भक्ति, पारिवारिक परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ के कारण चोपड़ा पूजन का महत्व है।

कैसे मनाते हैं

नए बही-खाते दीवाली से पहले ही ख़रीद लिए जाते हैं। जिल्द पर कुमकुम और अक्षत से एक ओर ‘शुभ’ और दूसरी ओर ‘लाभ’ लिखा जाता है, और बीच में स्वस्तिक बनाया जाता है। पहला पन्ना हाथ से, स्याही से लिखा जाता है। इसके लिए मुहूर्त सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में रखा जाता है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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