
मेलागुजराती · हिंदू
डांग दरबार
Dang Darbar
अभी कोई नियम नहीं
इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।
संक्षेप में
साल के इसी एक हफ़्ते डांग के पाँच राजाओं को भुगतान होता है, और खुला दरबार लगता है।
कथा
डांग को कभी अंग्रेज़ी राज में मिलाया नहीं गया। 1842 में अंग्रेज़ों ने जंगल उन भील राजाओं और नायकों से पट्टे पर लिए, जिनके कब्ज़े में वे थे, और बदले में रक़म चुकाना मंज़ूर किया। वही भुगतान, जिसे सालियाना कहते हैं, तब से हर साल होता है। 1947 के बाद भारत सरकार इसे चुकाती है। होली से पहले के दिनों में आहवा में खुला दरबार लगता है, राजा बैठते हैं, और उन्हें सालियाना सौंपा जाता है। इसके आसपास मेला जम जाता है। वारली, भील और कुनबी नृत्य होते हैं, बाज़ार लगता है, और पूरा ज़िला आहवा में उमड़ पड़ता है।
महत्व
अंग्रेज़ी राज के बही-खाते की एक प्रविष्टि आज त्योहार बन गई है। भारत में ऐसी गिनी-चुनी जगहों में यह एक है, जहाँ पुरानी राजसत्ता को आज भी हर साल विधिवत नक़द भुगतान करके माना जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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