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गुरु नानक गुरुपर्व

Guru Nanak Gurpurab

अगली तारीख़

मंगलवार, 24 नवंबर 2026

सूर्योदय के समय की तिथि
पूर्णिमा20:23 तक
नक्षत्र
कृत्तिका23:25 तक
मास
कार्तिक
सूर्योदय
06:57सूर्यास्त 17:54
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संक्षेप में

गुरु नानक गुरुपर्व सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मदिन है, जिन्होंने 15वीं सदी में पंजाब में जन्म लेकर जात-पात, ऊँच-नीच और खोखले कर्मकांड पर सवाल उठाए और एक ईश्वर के स्मरण, ईमानदारी की कमाई और मिल-बाँटकर खाने की सीख दी।

कथा

गुरु नानक गुरुपर्व सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मदिन है। उनका जन्म 15वीं सदी में पंजाब में हुआ था। उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच और खोखले कर्मकांड पर सवाल उठाए। उनकी सीख थी कि एक ईश्वर का स्मरण करो, ईमानदारी से कमाओ और दूसरों के साथ बाँटकर खाओ। सिख परंपरा में उनकी लंबी यात्राएँ उदासियाँ कहलाती हैं। इन यात्राओं में वे अलग-अलग धर्मों के लोगों से मिले और उनसे बातचीत की। जिन रीतियों का नैतिक अर्थ खो चुका था, उनका उन्होंने विरोध किया। उनकी बाणी में भक्ति के साथ न्याय, विनम्रता और सच्चे जीवन की सीधी बात है। उनके बहुत-से शबद गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं। गुरुपर्व पर अखंड पाठ, कीर्तन, नगर कीर्तन, सेवा और लंगर होते हैं। लंगर में सब लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर खाते हैं। भक्ति की असली परख रोज़ के आचरण और सेवा में होती है, यह दिन यही बात याद दिलाता है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

गुरु नानक देव जी को मानने वाले सभी लोगों के लिए यह गुरुपर्व बहुत महत्व रखता है। इससे धर्म, परिवार और संस्कृति की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी रहती है।

कैसे मनाते हैं

अखंड पाठ में पूरा गुरु ग्रंथ साहिब बिना रुके ऊँचे स्वर में पढ़ा जाता है। यह पाठ 48 घंटे पहले शुरू होता है और गुरुपर्व की सुबह पूरा होता है। एक दिन पहले पंज प्यारों की अगुवाई में नगर कीर्तन गलियों से निकलता है, और जो भी आता है उसे लंगर परोसा जाता है। गुजरात के गुरुद्वारों में भी यह दिन पंजाब की तरह ही मनाया जाता है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

जहाँ-जहाँ गुरुद्वारा है, वहाँ कार्तिक पूर्णिमा को यह दिन मनाया जाता है। गुरु जी का जन्मस्थान ननकाना साहिब पाकिस्तान में है, जिसे हर साल भारत के तीर्थयात्रियों के लिए खोला जाता है। पंजाब और दिल्ली में इससे पहले पूरे पखवाड़े प्रभात फेरियाँ निकलती हैं।

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