
जयंतीभारतीय · हिंदू
कबीर जयंती
Kabir Jayanti
अगली तारीख़
शुक्रवार, 18 जून 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- पूर्णिमाअगले दिन 06:14 तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा23:40 तक
- मास
- ज्येष्ठ
- सूर्योदय
- 05:53सूर्यास्त 19:28
संक्षेप में
कबीर जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तारीख़ और रीति-रिवाज़ क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
कबीर जयंती पंद्रहवीं सदी के कवि और संत कबीर की याद में मनाई जाती है। उनकी वाणी ने दिखावे के कर्मकांड, समाज के घमंड और जाति या धर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव पर सीधी चोट की। कबीर के जीवन के बारे में भक्तों में कई कथाएँ चलती हैं, पर उन्हें सबसे साफ़ उनकी वाणी ही पहचान दिलाती है। वह वाणी बार-बार बाहरी दिखावे से ध्यान हटाकर ईश्वर के सीधे अनुभव, ईमानदार मेहनत, करुणा और एक परमात्मा के सुमिरन की ओर ले जाती है। कबीर ने पंडितों या दरबार की भाषा में नहीं, आम लोगों की रोज़ की बोली में कहा। इसीलिए उनके दोहे और पद ज़बानी पूरे उत्तर भारत में फैल गए। हिंदू भक्ति परंपरा और सिख परंपरा, दोनों ने उनकी रचनाएँ सहेजी हैं और उन्हें आदर दिया है। गुरु ग्रंथ साहिब में भी उनके कई पद हैं। इस दिन भजन और सत्संग होते हैं, कबीर-वाणी का पाठ होता है, और पहचान या विधि से ऊपर सत्य और भीतरी बदलाव को रखने वाले मार्ग पर चिंतन होता है।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
कबीर जयंती भक्ति और पारिवारिक परंपरा का दिन है, जिसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।
कैसे मनाते हैं
कबीर के दोहे गाए जाते हैं, और यही इस दिन का उत्सव है, क्योंकि कबीर की न कोई मूर्ति है, न कोई विधि। कबीरपंथी मठों में सत्संग और भंडारा होता है। गुजरात में लोग कबीर को किसी पंथ से जितना जानते हैं, उतना ही भजन की परंपरा से भी।
Gujarati household practice के आधार पर
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