
त्योहारभारतीय · हिंदू
काली पूजा
Kali Puja
अगली तारीख़
रविवार, 8 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी11:28 तक
- नक्षत्र
- स्वातिअगले दिन 07:23 तक
- मास
- कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
- सूर्योदय
- 06:47सूर्यास्त 17:59
संक्षेप में
काली पूजा हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
बंगाल और पूर्वी भारत के कई इलाक़ों में दीवाली की रात की मुख्य पूजा काली पूजा है। वहाँ कार्तिक अमावस्या (अमांत पंचांग में आश्विन अमावस्या) की अँधेरी रात माँ काली को समर्पित होती है। श्याम वर्ण, गले में मुंडमाला, हाथों में शस्त्र और बाहर निकली जीभ, माँ काली का यह रूप उग्र है। पर भक्त इसे सिर्फ़ डरावना नहीं मानते। उनके लिए माँ काली वह जगदंबा हैं जो अहंकार, डर, अन्याय और आत्मा की मुक्ति में आड़े आने वाली हर शक्ति का नाश करती हैं। बंगाल में सार्वजनिक काली पूजा का चलन पिछली कुछ सदियों में ख़ास तौर पर बढ़ा। आज यह घर की छोटी-सी पूजा से लेकर बड़े सामुदायिक पंडालों तक हर जगह होती है। माँ की प्रतिमा स्थापित की जाती है, दीये जलाए जाते हैं, मंत्र और स्तोत्र पढ़े जाते हैं, और बहुत से भक्त रात भर जागरण करते हैं। कालीघाट और दक्षिणेश्वर जैसे मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है। दीवाली की रात ही यह पूजा होने से एक गहरा विरोधाभास दिखता है। अमावस्या की सबसे अँधेरी रात में दीयों की क़तारें जगमगाती हैं, और माँ काली अंधकार का सामना करके उसे बदल देने के आध्यात्मिक साहस का प्रतीक बनती हैं।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
काली पूजा का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
पूजा आधी रात को शुरू होती है और भोर तक चलती है। माँ को गुड़हल के फूल चढ़ाए जाते हैं। कई जगह बकरे की बलि भी दी जाती है, हालाँकि अब ज़्यादातर पंडालों में फल और मिठाई चढ़ाई जाती है। एक रात पहले चौदह दीये जलाए जाते हैं और चौदह तरह के साग खाए जाते हैं। कालीघाट और दक्षिणेश्वर में दो दिन तक भीड़ कम नहीं होती।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
काली पूजा बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में, और बंगाल से बाहर बसे बंगाली परिवारों में होती है। दक्षिणेश्वर और कालीघाट में साल की सबसे बड़ी भीड़ इसी समय उमड़ती है। दूसरी जगहों पर इसी रात लक्ष्मी पूजा होती है। जो बंगाली परिवार दोनों पूजाएँ करते हैं, वे दोनों को साथ-साथ करते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
तिथि कैलेंडर आपके फ़ोन में
आपके अपने शहर का पंचांग, चौघड़िया, त्योहार और रिमाइंडर। ऐप इंटरनेट के बिना भी चलता है।