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जयंतीभारतीय · हिंदू

कूर्म जयंती

Kurma Jayanti · कच्छप जयंती

अगली तारीख़

गुरुवार, 20 मई 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
पूर्णिमा16:28 तक
नक्षत्र
विशाखा13:20 तक
मास
वैशाख
सूर्योदय
05:55सूर्यास्त 19:16
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संक्षेप में

कूर्म जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

कूर्म जयंती पर भगवान विष्णु के कछुए वाले रूप, कूर्म अवतार की पूजा होती है, और इस अवतार की कथा समुद्र मंथन से ही जुड़ी है। देवताओं और असुरों ने अमृत पाने के लिए सागर मथने का निश्चय किया। मंदराचल पर्वत को मथानी बनाया गया और वासुकि नाग को रस्सी। विशाल पर्वत सागर में डूबने लगा, तब भगवान विष्णु ने महाकाय कछुए का रूप लिया और पर्वत को अपनी पीठ पर थाम लिया। इस तरह पूरे मंथन को मज़बूत आधार मिला। अमृत निकलने से पहले मंथन से माँ लक्ष्मी समेत अनेक रत्न और दिव्य जीव प्रकट हुए। कूर्म भगवान का काम शांत है, पर उसके बिना कुछ भी संभव नहीं था। यह अवतार बल से नहीं जीतता, बल्कि भारी बोझ उठाए रखता है, ताकि सबका कठिन काम चलता रहे। इसलिए यह जयंती धैर्य, स्थिरता, दूसरों को सहारा देने की भावना और दिखने वाली सफलता के पीछे लगे निरंतर प्रयास की याद दिलाती है।

महत्व

कूर्म जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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