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त्योहारजैन · श्वेतांबर

महावीर जन्म कल्याणक

Mahavir Janma Kalyanak

अगली तारीख़

रविवार, 18 अप्रैल 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल द्वादशी07:42 तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनीअगले दिन 05:14 तक
मास
चैत्र
सूर्योदय
06:15सूर्यास्त 19:02
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संक्षेप में

महावीर जन्म कल्याणक पर जैन समाज वर्तमान युग के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान वर्धमान महावीर का जन्मोत्सव मनाता है, और राजपरिवार में उनके जन्म से पहले माता के देखे शुभ स्वप्नों को याद करता है।

कथा

जैन परंपरा के अनुसार वर्तमान युग के चौबीसवें तीर्थंकर वर्धमान महावीर का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। उनके जन्म से पहले माता ने शुभ स्वप्न देखे थे। सुख-सुविधा में पले होने पर भी लगभग तीस वर्ष की आयु में वर्धमान ने गृहस्थ जीवन त्याग दिया। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने कठोर तप, ध्यान और अनासक्ति की साधना की। उन्हें केवलज्ञान, यानी पूर्ण ज्ञान, प्राप्त हुआ। फिर उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य या संयम, और अपरिग्रह का मार्ग बताया। उनके उपदेशों से साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका का चतुर्विध संघ बना। इसलिए यह दिन केवल जन्म का उत्सव नहीं है। शोभायात्रा, मंदिर में पूजा, दान और महावीर स्वामी के जीवन का पाठ, ये सब उसी कठिन आदर्श की ओर लौटाते हैं कि रोज़ के जीवन में हिंसा, आसक्ति और अहंकार कम किए जाएँ।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

महावीर जन्म कल्याणक इसे मनाने वाले समाज के लिए महत्वपूर्ण दिन है, और इससे धर्म, परिवार और संस्कृति की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी रहती है।

कैसे मनाते हैं

सजे हुए रथ में भगवान की प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकलती है, और मंदिर में अभिषेक होता है। कई जगह त्रिशला माता के चौदह स्वप्नों का मंचन होता है। इस दिन का असली सार दान है, चाहे भोजन का हो, दवा का हो या जीवदया के लिए। गुजरात में इस दिन सार्वजनिक छुट्टी रहती है।

Gujarati household practice के आधार पर

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