
एकादशीगुजराती · हिंदू
मोहिनी एकादशी
Mohini Ekadashi
अगली तारीख़
रविवार, 16 मई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल एकादशी17:13 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी11:35 तक
- मास
- वैशाख
- सूर्योदय
- 05:57सूर्यास्त 19:15
संक्षेप में
मोहिनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तारीख़ और रीति-रिवाज़ क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
मोहिनी एकादशी की कथा धनपाल नाम के एक धनी व्यापारी और उसके बेटे की है। बेटे का नाम ज़्यादातर धृष्टबुद्धि बताया जाता है, हालाँकि अलग-अलग इलाक़ों में नाम थोड़ा बदल जाता है। इज़्ज़तदार घर में जन्म लेकर भी वह बुरी राह पर चल पड़ा। उसने बुरी आदतों में धन उड़ा दिया, और आख़िर में परिवार ने भी उसका साथ छोड़ दिया। दुख में भटकते-भटकते वह कौंडिन्य ऋषि के आश्रम पहुँचा। उसने ऋषि से पूछा कि अपने कर्मों के फल से कैसे छुटकारा मिले। ऋषि ने कहा कि सच्चे मन से, भगवान विष्णु की भक्ति के साथ मोहिनी एकादशी का व्रत करो। कथा है कि व्रत के संयम से उसके जीवन में मोड़ आया। उसने पुराना जीवन छोड़ दिया और उसका मन शुद्ध हो गया। इसलिए इस कथा में मोहिनी एकादशी केवल मनोकामना पूरी करने वाला व्रत नहीं है। ग़लती मानना, संयम अपनाना और जीवन को भक्ति की ओर मोड़ना, यह सुधरने की कथा है। उपवास, विष्णु पूजा, कथा सुनना और द्वादशी को पारण, इस व्रत के मुख्य अंग हैं।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
असुरों से अमृत वापस लेने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धरा था, और इस एकादशी का नाम उसी रूप से है। यह व्रत मोह और भ्रम से छूटने के लिए रखा जाता है, और कथा का भीतरी अर्थ भी यही है।
उपवास
यह वैशाख शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया के अगले हफ़्ते आती है। उपवास सामान्य एकादशी जैसा है।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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