
जयंतीभारतीय · हिंदू
नरसिंह जयंती
Narasimha Jayanti
अगली तारीख़
मंगलवार, 18 मई 2027
संक्षेप में
नरसिंह जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
नरसिंह जयंती पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार का प्राकट्य याद किया जाता है। आधे मनुष्य और आधे सिंह का यह रूप उन्होंने बाल भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए धारण किया था। कथा है कि प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु शक्तिशाली असुरराज था। उसने ऐसा वरदान पा लिया था कि उसे मारना लगभग असंभव हो जाए, और वह सबसे अपनी ही पूजा करवाना चाहता था। बार-बार दंड मिलने पर भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। आख़िर हिरण्यकशिपु ने ललकारा कि क्या तेरा विष्णु इस खंभे में भी है। तब उसी खंभे से भगवान नरसिंह रूप में प्रकट हुए। संध्या का समय था, वे देहरी पर थे, और उनका रूप न पूरा मनुष्य का था, न पूरा पशु का। इस तरह वरदान की एक भी शर्त तोड़े बिना भगवान ने उस अत्याचारी का अंत किया। यह कथा बताती है कि सच्ची भक्ति और धर्म को सत्ता या अहंकार आख़िरकार कुचल नहीं सकते।
महत्व
नरसिंह जयंती का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
उपवास
दिन भर का उपवास चंद्रोदय पर नहीं, शाम को पूजा के बाद खोला जाता है। पूजा सूर्योदय पर नहीं, संध्या के समय होती है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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