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पापमोचनी एकादशी

Papmochani Ekadashi

अगली तारीख़

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027

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संक्षेप में

पापमोचनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तारीख़ व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

पापमोचनी एकादशी की कथा मेधावी ऋषि और अप्सरा मंजुघोषा की है। मेधावी ऋषि वन में कठोर तप कर रहे थे। तभी मंजुघोषा को उस वन में भेजा गया। उसने अपने संगीत और रूप से ऋषि का ध्यान खींच लिया। धीरे-धीरे ऋषि अपनी साधना भूल गए और बहुत समय तक मंजुघोषा के साथ में ही डूबे रहे। बहुत बाद में उन्हें होश आया कि कितना समय बीत चुका है। क्रोध में आकर उन्होंने मंजुघोषा को शाप दे दिया। फिर शांत मन से सोचने पर दोनों ने अपने कर्मों के फल से छूटने का उपाय खोजा। कथा के अनुसार वह उपाय पापमोचनी एकादशी का व्रत था। इस व्रत से दोनों शुद्ध हुए और शाप से मुक्ति मिली। यह कथा केवल मोह को दोष नहीं देती। यह दिखाती है कि होश खो देने पर संयमी व्यक्ति भी अपने चुने हुए मार्ग से भटक जाता है, और एक भूल के बाद क्रोध दूसरी भूल करवा देता है। इसलिए इस व्रत में संयम, पश्चाताप, क्षमा और भगवान विष्णु की भक्ति में फिर से मन लगाने पर ज़ोर दिया जाता है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

चैत्र से शुरू होने वाले चंद्र वर्ष की यह आख़िरी एकादशी है। नाम के अनुसार ही यह नया साल आने से पहले पापों से छुड़ाती है।

उपवास

यह साल की चौबीसवीं और आख़िरी एकादशी है, जो चैत्र कृष्ण पक्ष (अमांत पंचांग में फाल्गुन) में आती है। सारी एकादशियाँ रखने वालों का व्रत-क्रम यहीं पूरा होता है।

Gujarati household practice के आधार पर

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