त्योहारपारसी
पतेती
Pateti
अभी कोई नियम नहीं
इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।
इस परंपरा के जानकार चित्र की जाँच न कर लें, तब तक वह यहाँ नहीं दिखाया जाता।
संक्षेप में
पतेती पारसी साल के अंत में आने वाला ‘पतेत’ यानी पश्चाताप का दिन है, जब लोग अपनी भूलों को याद कर क्षमा माँगते हैं और साफ़ मन से नए साल में क़दम रखने की तैयारी करते हैं।
कथा
पारसी परंपरा में पतेती साल के अंत में आने वाला पश्चाताप और आत्मचिंतन का दिन है। ‘पतेत’ का अर्थ है पश्चाताप। इस दिन लोग अपनी भूलों को याद करते हैं, क्षमा माँगते हैं और साफ़ मन से नए साल में क़दम रखने की तैयारी करते हैं। भारत में अक्सर पारसी नववर्ष के जश्न को ही पतेती कह दिया जाता है, इसलिए भ्रम होता है। परंपरा के अनुसार पारसी समाज के अपने कैलेंडर में चिंतन का यह दिन नवरोज़ से पहले आता है। इस दिन की प्रार्थनाओं में मन की शुद्धि, सही आचरण और आपसी मेल-मिलाप की बात होती है। परिवार घर की साफ़-सफ़ाई करते हैं, दिवंगत परिजनों को याद करते हैं, दान देते हैं और इसके बाद आने वाले नववर्ष के जश्न की तैयारी करते हैं। इस तरह मन आत्मचिंतन से नई शुरुआत की ओर बढ़ता है। पारसी धर्म अच्छे विचार, अच्छे वचन और अच्छे कर्म पर विशेष ज़ोर देता है। इसलिए पतेती साल में एक बार रुककर अपनी कमियाँ देखने और अधिक ईमानदारी व ज़िम्मेदारी के साथ फिर से शुरुआत करने का दिन है।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
पतेती पारसी समाज के लिए महत्वपूर्ण दिन है। इससे धार्मिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपरा बनी रहती है।
कैसे मनाते हैं
इस दिन अगियारी में या घर पर पतेत प्रार्थना पढ़ी जाती है। पतेती ख़ुशियाँ मनाने का नहीं, आत्मचिंतन का दिन है। ख़ुशियाँ अगले दिन नवरोज़ पर मनाई जाती हैं। भारत में ये दोनों दिन काफ़ी हद तक एक-दूसरे में घुल-मिल गए हैं, और लोग जो शुभकामना भेजते हैं वह अक्सर दोनों दिनों के लिए होती है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
भारत में ‘पतेती’ शब्द आम तौर पर पारसी नववर्ष के लिए ही इस्तेमाल होता है, जबकि पतेती नववर्ष नहीं है। नववर्ष तो अगले दिन आने वाला नवरोज़ है। यह भ्रम पुराना है और अब अख़बारों और शुभकामनाओं समेत लगभग हर जगह है। भारत के ज़्यादातर पारसी शहंशाही गणना मानते हैं, जिसमें पतेती और नवरोज़ अगस्त में आते हैं। मार्च में दिन और रात बराबर होने के दिन मनाया जाने वाला नवरोज़ इससे अलग त्योहार है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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