
जयंतीगुजराती · हिंदू
शनि जयंती
Shani Jayanti
अगली तारीख़
शुक्रवार, 4 जून 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- अमावस्याअगले दिन 01:10 तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका09:13 तक
- मास
- ज्येष्ठअमांत पंचांग में वैशाख
- सूर्योदय
- 05:52सूर्यास्त 19:23
संक्षेप में
शनि जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
शनि जयंती शनिदेव के जन्म का दिन है। शनिदेव ग्रह देवता हैं, और कर्म, अनुशासन और कर्मों के फल से उनका नाम जुड़ा है। पुराणों में शनिदेव को सूर्यदेव और छाया का पुत्र बताया गया है। जन्म की प्रचलित कथा है कि गर्भ के दिनों में छाया भगवान शिव की पूजा में पूरी तरह लीन रहती थीं, इसलिए शनिदेव गंभीर और तपस्वी स्वभाव लेकर जन्मे। आगे की कथाओं में शनिदेव और सूर्यदेव के बीच अनबन की बात आती है। शनिदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की, और उसके बाद उन्हें नवग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान मिला। लोग अक्सर शनिदेव को केवल दुर्भाग्य लाने वाला मानते हैं, पर भक्ति की परंपरा में वे कठोर न्याय करने वाले देवता हैं। उनका प्रभाव धैर्य, ज़िम्मेदारी और विनम्रता सिखाता है। शनि जयंती पर भक्त शनिदेव या नवग्रह के मंदिर जाते हैं, तिल का तेल, काले तिल या दीया चढ़ाते हैं, शनि स्तोत्र और हनुमान जी की स्तुति का पाठ करते हैं और दान देते हैं। वे कर्मों के फल से बचने की प्रार्थना भर नहीं करते, बल्कि अपना आचरण सुधारने पर विचार करते हैं।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
शनि जयंती का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक व मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
शनिदेव की मूर्ति पर तेल चढ़ता है, और काले तिल, काला कपड़ा और लोहा दान होता है। शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या (अमांत पंचांग में वैशाख) को पड़ती है, और गुजरात में इसी दिन वट सावित्री भी होती है। इसलिए एक ही सुबह एक ओर पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है, और दूसरी ओर गली के छोर पर शनि मंदिर में तेल चढ़ता है।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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