
दिवसगुजराती · हिंदू
शारदा पूजन
Sharda Puja · शारदा पूजा
अगली तारीख़
रविवार, 8 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी11:28 तक
- नक्षत्र
- स्वातिअगले दिन 07:23 तक
- मास
- कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
- सूर्योदय
- 06:47सूर्यास्त 17:59
संक्षेप में
शारदा पूजन हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
शारदा पूजन गुजरात में दिवाली पर होने वाली माँ सरस्वती के शारदा रूप की पूजा है। माँ शारदा ज्ञान, स्मृति, वाणी और विवेक देने वाली देवी हैं। आम तौर पर लक्ष्मी जी और गणेश जी के साथ उनकी पूजा होती है। तीनों की एक साथ पूजा के पीछे एक व्यावहारिक आध्यात्मिक बात है। लक्ष्मी तभी सार्थक है जब उसे ज्ञान और सही समझ का साथ मिले, और हर नए काम में गणेश जी का आशीर्वाद चाहिए। किताबें, हिसाब की बहियाँ, कलम और पढ़ाई या काम-काज के दूसरे साधन माँ शारदा के सामने रखे जाते हैं और उन पर शुभ चिह्न बनाए जाते हैं। व्यापारी परिवारों में शारदा पूजन और चोपड़ा पूजन स्वाभाविक रूप से एक हो जाते हैं, क्योंकि नए साल का हिसाब सिर्फ़ पैसों का ब्योरा नहीं है। वह फ़ैसलों, ज़िम्मेदारी और धन के संयमित उपयोग का प्रतीक है। इस तरह शारदा पूजन दिवाली की समृद्धि की प्रार्थना को ऐसी प्रार्थना बना देता है जिसमें समृद्धि के साथ समझ भी माँगी जाती है।
महत्व
शारदा पूजन का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
कलम और नई बहियाँ प्रतिमा या तस्वीर के सामने रखी जाती हैं, और पूजन पूरा होने तक उस कलम से कुछ नहीं लिखा जाता।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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