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रथ सप्तमी

Ratha Saptami · Magha Saptami · Surya Jayanti

अगली तारीख़

शनिवार, 13 फ़रवरी 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल सप्तमीअगले दिन 02:07 तक
नक्षत्र
भरणीअगले दिन 05:37 तक
मास
माघ
सूर्योदय
07:12सूर्यास्त 18:35
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संक्षेप में

रथ सप्तमी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज क्षेत्र व स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

रथ सप्तमी सूर्यदेव को समर्पित है। इसे सूर्य जयंती, अचला सप्तमी या माघ सप्तमी भी कहते हैं। इस दिन सात घोड़ों के रथ पर विराजमान सूर्यदेव का स्मरण होता है, जिनके सारथी अरुण हैं। अलग-अलग परंपराओं में इन सात घोड़ों को प्रकाश के सात रंग, सप्ताह के सात दिन या वेद के सात छंद माना जाता है। लगातार चलता रथ समय में आगे बढ़ती सूर्य की जीवनदायी यात्रा का प्रतीक है। यह त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष में, मकर संक्रांति के कुछ ही दिन बाद आता है, और बढ़ते प्रकाश व सूर्य की ऊर्जा के स्वागत का दिन माना जाता है। भक्त परंपरा के अनुसार सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं, और कुछ लोग शरीर पर आक के पत्ते रखकर नहाते हैं। फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, और आदित्य हृदय या गायत्री जैसी सूर्य की प्रार्थनाओं का पाठ करते हैं। यह दिन सूर्य के प्रकाश, सेहत और खेती पर टिके जीवन के प्रति कृतज्ञता को अंधेरे से उजाले की ओर जाने के आध्यात्मिक भाव से जोड़ता है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

रथ सप्तमी का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

कैसे मनाते हैं

भोर में सूर्य की ओर मुँह करके, सिर और कंधों पर आक के पत्ते रखकर स्नान किया जाता है, और सूर्य उगते समय अंजुली में जल लेकर अर्घ्य दिया जाता है। घर के दरवाज़े पर सात घोड़ों वाले रथ की रंगोली बनाई जाती है। खुले में नए चूल्हे पर खीर पकाई जाती है, जिसका भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

Gujarati household practice के आधार पर

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