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त्योहारगुजराती · हिंदू

वाघ बारस

Vagh Baras

अगली तारीख़

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

51 दिन बाद
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संक्षेप में

वाघ बारस हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज क्षेत्र व स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

वाघ बारस गोवत्स द्वादशी का गुजराती नाम है। दीवाली के दिनों की शुरुआत में आने वाला यह दिन गाय और बछड़े की पूजा का है। गुजरात में लोग इस नाम को 'वाघ' और 'वसु' शब्दों से जोड़कर भी समझाते हैं, पर पूजा का मूल भाव गाय और उसके बछड़े के बीच की ममता है। गाय बहुत पहले से पोषण, खेती, कृष्ण-भक्ति और घर की रोज़ी-रोटी से जुड़ी रही है। इसलिए इस दिन की पूजा सिर्फ़ धन की इच्छा से नहीं, बल्कि पालन-पोषण और गुज़ारे के लिए आभार जताने के लिए होती है। जहाँ यह रिवाज अब भी जीवित है, वहाँ परिवार गाय को नहलाकर सजाते हैं, कुमकुम या हल्दी लगाते हैं, चारा खिलाते हैं और आरती उतारते हैं। कुछ समुदायों में स्त्रियाँ संतान की कुशलता के लिए व्रत रखती हैं और उस दिन गाय का दूध या कुछ अनाज से बनी चीज़ें नहीं खातीं। व्यापारियों के लिए वाघ बारस इस बात का संकेत भी है कि धनतेरस आ पहुँची है और दीवाली से पहले पुराना हिसाबी साल पूरा होने को है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

वाघ बारस का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

Gujarati household practice के आधार पर

कैसे मनाते हैं

गाय और बछड़ों को नहलाकर, तिलक लगाकर कुछ मीठा खिलाया जाता है। इस दिन के बाद व्यापारी पुरानी बही में कोई नई प्रविष्टि नहीं करते। सौराष्ट्र में आज भी पशुओं को विधिवत बाहर लाकर यह दिन मनाया जाता है, जबकि शहरों में यह त्योहार ज़्यादातर बही-खातों और मिठाई तक सिमट गया है।

Gujarati household practice के आधार पर

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