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व्रतभारतीय · हिंदू

करवा चौथ

Karwa Chauth

अगली तारीख़

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

43 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण चतुर्थी22:10 तक
नक्षत्र
रोहिणी11:11 तक
मास
कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
सूर्योदय
06:41सूर्यास्त 18:04
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संक्षेप में

करवा चौथ मुख्य रूप से उत्तर भारत में दांपत्य सुख का व्रत है, जिसमें परंपरा से दिन भर का उपवास चंद्रोदय के बाद खुलता है।

कथा

करवा चौथ दांपत्य जीवन से जुड़ा व्रत है, जो ख़ासकर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में रखा जाता है। इसकी सबसे ज़्यादा कही जाने वाली कथा वीरावती की है। वीरावती पति के प्रति समर्पित पत्नी थी, और कठोर उपवास से कमज़ोर हुई बहन को उसके सात भाई देख नहीं पाए। बहन जल्दी व्रत खोल ले, इसलिए उन्होंने चाँद निकलने जैसा दृश्य बना दिया। इसके बाद वीरावती पर संकट आया, तब उसे समझ आया कि व्रत अधूरा रह गया था। उसने पूरी श्रद्धा से फिर व्रत किया, और आख़िर में पति का जीवन और सुख वापस पाया। दूसरे इलाक़ों में भी ऐसी ही पतिव्रता स्त्रियों की कथाएँ कही जाती हैं, जिनका साहस परिवार की रक्षा करता है। इसलिए यहाँ कोई एक ही कथा नहीं, बल्कि अटूट निष्ठा मूल भाव है। स्त्रियाँ परंपरा के अनुसार दिन भर उपवास रखती हैं, शिव-पार्वती या गौरी की पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं, और चाँद के दर्शन करके अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।

महत्व

करवा चौथ का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

उपवास

बिना पानी का यह निर्जला उपवास सूर्योदय से पहले से चंद्रदर्शन तक चलता है। भोर से पहले सरगी खाई जाती है, और अर्घ्य देकर छलनी से चाँद देखने के बाद ही व्रत खुलता है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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